बिलासपुर/प्रयागराज। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण तब आया जब बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक रमेश चंद्र श्रीवास्तव को थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) द्वारा “विद्या वाचस्पति” (मानद पीएच.डी) से सम्मानित किया गया। यह अलंकरण प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) स्थित भजनानंद आश्रम के सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया।
समारोह में कुलाधिपति स्वामी हरिहरानंद महाराज मुख्य अतिथि रहे, जबकि कुलपति डॉ. विनय पाठक की अध्यक्षता में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रतिकुलपति डा. जंग बहादुर पांडे तथा कुल सचिव डॉ. पीएस दयालयति की विशिष्ट उपस्थिति ने समारोह की गरिमा बढ़ाई।
रमेश चंद्र श्रीवास्तव को यह सम्मान उनके शोध ग्रंथ ‘विकलांग विमर्श: चुनौतियां एवं समाधान’ पर प्रदान किया गया। वे भारतीय सांख्यिकीय सेवा (ISS) से सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका शोध सामाजिक सरोकारों को नई दृष्टि देने वाला माना जा रहा है।
डॉ. गजेंद्र तिवारी को “विद्यासागर” (मानद डी.लिट) की उपाधि
इसी समारोह में शिक्षाविद डॉ. गजेंद्र तिवारी को उनके शोध प्रबंध “कोयला क्षेत्र में कार्यरत आदिवासी महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति: चिरमिरी के संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” पर “विद्यासागर” (मानद डी.लिट) की उपाधि से विभूषित किया गया।
डॉ. तिवारी इससे पहले भी शिक्षा और आदिवासी उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित हो चुके हैं—
- 25 जून 2018 को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के लोकव्यापीकरण हेतु सम्मान।
- 7 अगस्त 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मानव संसाधन विकास में अनुकरणीय योगदान के लिए पुनः सम्मान।
- 13 दिसंबर 2020 को कोविड-19 काल में शिक्षा की सतत प्रक्रिया बनाए रखने के लिए राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल द्वारा सम्मानित।
डॉ. गजेंद्र तिवारी वर्तमान में अपनी संस्था के माध्यम से आदिवासी बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सतत कार्यरत हैं।
छत्तीसगढ़ की बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान
प्रयागराज में आयोजित इस समारोह ने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर की साहित्यिक और शैक्षणिक चेतना राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही है। रमेश चंद्र श्रीवास्तव और डॉ. गजेंद्र तिवारी को मिली ये मानद उपाधियां न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हैं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सम्मान और प्रेरणा का स्रोत हैं।















