बिलासपुर: BJP के कार्यक्रम में बच्चों की भीड़ जुटाने का आदेश? DEO ऑफिस की सहायक संचालक वर्षा शर्मा के हस्ताक्षर वाला पत्र चर्चा में

DPI उप संचालक अशोक बंजारा की ‘गुड बुक’ में वर्षा शर्मा! सूत्रों के दावे ने बढ़ाई चर्चा

BJP के कार्यक्रम के लिए स्कूलों को निर्देश? DEO कार्यालय के पत्र पर सवाल, सहायक संचालक वर्षा शर्मा बोलीं—बच्चों को बुलाया ही नहीं

1600 बच्चों की मौजूदगी पर सवाल, अधिकारी बोलीं—किसी को बुलाया ही नहीं! बिलासपुर में सरकारी आदेश का सच क्या?

BJP के कार्यक्रम के लिए सरकारी पत्र किसके इशारे पर? वर्षा शर्मा के बयान ने उलझाया मामला

बिलासपुर: लोकतंत्र में प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होता है, किसी राजनीतिक अभियान के प्रति नहीं। लेकिन बिलासपुर में 7 अक्टूबर को बहतराई स्टेडियम में हुए बीजेपी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विद्यार्थियों की सहभागिता को लेकर सामने आए तथ्यों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्र क्रमांक 12128/सेवा संकल्प/2026 में बहतराई स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के लिए शासकीय, और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता तथा 1,600 छात्र-छात्राओं की संख्या का उल्लेख सामने आया है।

दूसरी ओर, सहायक संचालक वर्षा शर्मा, जिनके पास क्रीड़ा सेक्शन की जिम्मेदारी भी है, का कहना है कि खेल प्रतियोगिता के उद्घाटन कार्यक्रम के लिए किसी बच्चे को बुलाया ही नहीं गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा शर्मा ने संबंधित पत्र की जानकारी होने से भी इनकार किया।जब अधिकारी कह रही हैं कि बच्चे बुलाए ही नहीं गए, तो फिर सरकारी पत्र में विद्यार्थियों की संख्या और सहभागिता का उल्लेख किस आधार पर किया गया?यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।आदेश किसका, जवाबदेही किसकी? यदि विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित कर विद्यालयों को निर्देश दिए गए थे, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि आदेश किसके अनुमोदन से जारी हुआ और संख्या तय करने का आधार क्या था। यदि ऐसा कोई निर्देश नहीं था, तो पत्र में विद्यार्थियों की सहभागिता का उल्लेख क्यों किया गया?

सरकारी आदेश और अधिकारी के बयान के बीच यह अंतर सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय है या विभागीय समन्वय की विफलता—इसका जवाब दस्तावेजों से मिलना चाहिए।बच्चे शिक्षा के लिए हैं, भीड़ जुटाने के लिए नहींखेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी हैं। लेकिन यदि बच्चों को केवल निर्धारित संख्या पूरी करने के लिए बुलाया जाता है, तो यह उनकी पढ़ाई और शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

निजी स्कूलों के लिए भी संख्या तय किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सहभागिता स्वैच्छिक थी या विद्यालयों पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का दबाव था। यदि कार्यक्रम सरकारी था, तो उसका शैक्षणिक उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। यदि वह राजनीतिक संगठन का आयोजन था, तो उसमें सरकारी विभाग के आधिकारिक पत्र और प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल का आधार भी सामने आना चाहिए। बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं, लेकिन सवालों को अनदेखा करना भी जवाबदेही से बचना होगा।

अब जवाब देना होगा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि पत्र किसके निर्देश पर जारी हुआ, 1,600 विद्यार्थियों की संख्या किसने तय की और संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी।सरकारी लेटरपैड पर जारी आदेश कोई औपचारिक कागज नहीं, प्रशासनिक जिम्मेदारी का दस्तावेज होता है।

यदि आदेश जारी हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए; यदि आदेश का आशय कुछ और था, तो सच्चाई सार्वजनिक होनी चाहिए। सुशासन का अर्थ केवल अभियानों के नाम में ‘सेवा’ जोड़ना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। शिक्षा विभाग का असली संकल्प बच्चों की शिक्षा और भविष्य होना चाहिए—किसी भी कार्यक्रम में उनकी संख्या पूरी करना नहीं।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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