बिलासपुर। लिंगियाडीह बचाओ सर्वदलीय विकास समिति के आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब पिछड़ा वर्ग के प्रदेश उपाध्यक्ष दिलीप कौशिक एवं कुर्मी समाज के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र कौशिक आंदोलन स्थल पर पहुंचे और खुलकर समर्थन किया। उनके साथ विभिन्न समाजों के प्रबुद्धजन, सामाजिक नेता एवं बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
सभा को संबोधित करते हुए दिलीप कौशिक ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “यह सरकार गरीबों को सताने और उन्हें उजाड़ने का काम कर रही है। लिंगियाडीह को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि यहां गरीब तबका निवास करता है। अमीरों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों को हटाने की साजिश रची जा रही है। अब यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पूरे समाज की ताकत आपके साथ खड़ी है।”
वहीं सत्येंद्र कौशिक ने कहा कि “लिंगियाडीह में वर्चस्व की लड़ाई के नाम पर आम जनता को परेशान किया जा रहा है। गरीबी को अपराध बना दिया गया है। जिस अत्याचार को हम फिल्मों में देखते थे, वह आज यहां हकीकत बन चुका है। यह लड़ाई अब सिर्फ लिंगियाडीह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे प्रदेश में उठेगी, क्योंकि यहां हम सबके परिवार रहते हैं।”
विभिन्न समाजों का एकजुट समर्थन
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन को समर्थन देने वालों में—
- मानिकपुरी समाज से प्रदीप महंत, अशोक मानिकपुरी
- सोनकर समाज से रामेश्वर केशरी, दिनेश घोरे, प्रवीण गोयल
- गौ सेवक रूपेश साहू
- यादव समाज से संजय यादव, कुमेंद्र यादव
- ठाकुर समाज से संजय सिंह चौहान
सहित अनेक समाजों के प्रतिनिधि और प्रबुद्धजन शामिल रहे।
महिलाओं का फूटा गुस्सा, महाधरना अनिश्चितकालीन
स्थानीय महिलाओं ने दो टूक कहा कि “हमने वोट दिया, लेकिन बदले में हमें उजाड़ने की तैयारी मिली। किस्तों में बस्तियों को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। चिंगराजपारा, चांटीडीह, बहतराई, खमतराई, मोपका, डबरीपारा—हर जगह गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। सवाल यह है कि बार-बार टारगेट लिंगियाडीह को ही क्यों किया जा रहा है?”
महिलाओं ने चेतावनी दी कि “हम सब वर्ग एकजुट हो चुके हैं और इस लड़ाई को बड़ा जनआंदोलन बनाया जाएगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक अनिश्चितकालीन महाधरना जारी रहेगा।”
दुर्गा नगर की महिलाओं की अग्रणी भूमिका
पिछले कई दिनों से दुर्गा नगर की महिलाओं द्वारा दिए जा रहे महाधरना में प्रमुख रूप से श्याम मूरत कौशिक, डॉ. रघु साहू, भोलाराम साहू, प्रशांत मिश्रा, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, महेश्वर साहू, राम प्रकाश केवंट, पिंकी देवांगन, यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, उमा मिश्रा, सबिता डे, वंदना डे, हेमलता देवांगन, लता देवांगन, पुष्पा देवांगन, राजकुमारी देवांगन, साधना यादव, कल्पना यादव, जमुना शर्मा, संगीता यादव, रूपा सरकार, सीता साहू, ललिता मानिकपुरी, अर्पणा पटेल, शीला सिंह, लीला, उर्मिला, अनीता पाटिल, कुंती प्रजापति, सोनिया निषाद, कुमारी निषाद, रेशमी अहिरवार, उमा अहिरवार, सोनू गोस्वामी, श्रवण मानिकपुरी, डॉ. अशोक शर्मा, टिंकू, सतीश, महेश्वर, बलराम, अग्नू सूरज यादव, लखन कश्यप, अनिकेत कश्यप, राजा पाटिल सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अब केवल एक मोहल्ले की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह गरीबों के हक, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। सर्वदलीय समर्थन और महिलाओं की आक्रामक भागीदारी ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज़ होने वाला है।















