बिलासपुर: कलेक्टर अवनीश शरण और एसडीएम पीयूष तिवारी की जमकर हो रही प्रशंसा

तालाब पाटने वालों पर प्रशासन सख्त, SDM ने दिया तालाब को मूल स्वरूप में लाने का आदेश

तालाब पाटने वालों पर कलेक्टर की सख्ती, 25,000 का जुर्माना और जमीन मूल स्वरूप में लाने का आदेश

बिलासपुर। प्रशासन ने ग्राम कोनी स्थित खसरा नंबर 126 की तालाब भूमि को पाटने वालों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। एसडीएम पीयूष तिवारी ने तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाने के लिए नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन जारी किया है। ज्ञापन में यह भी निर्देश दिया गया है कि इस कार्यवाही में आने वाला खर्च संबंधित दोषियों से वसूला जाए।

सात दिनों में नहीं हुआ आदेश का पालन
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने न्यायालय के आदेश (दिनांक 27/12/24) में अनावेदकों को निर्देश दिया था कि वे तालाब को सात दिनों के भीतर उसके मूल स्वरूप में परिवर्तित कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। लेकिन निर्धारित समय सीमा के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासन ने कठोर कदम उठाते हुए यह ज्ञापन जारी किया।

तहसीलदार की जांच में हुआ खुलासा
बिलासपुर कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर पिछले महीने नगर निगम क्षेत्र के तालाबों की जांच की गई थी। एसडीएम द्वारा कराई गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि ग्राम कोनी स्थित खसरा नंबर 126, रकबा 0.299 हेक्टेयर, जो कि हजारी प्रसाद पिता रामप्रसाद के नाम पर दर्ज है, मिसल के कालम 4 में ‘पानी के ऊपर’ और वाजिबुल अर्ज के कालम 2 में ‘तालाब’ के रूप में अंकित है।

तहसीलदार की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि अनावेदक व्यासनारायण पाण्डेय पिता रामचरण और सुरेंद्र पाण्डेय पिता रामलाल ने तालाब को पाटकर खेत में बदल दिया। जांच में दोष सिद्ध होने पर भू राजस्व संहिता की धारा 242 के तहत मामला दर्ज किया गया।

जुर्माना और आदेश
एसडीएम ने दोषियों से जवाब मांगा। अनावेदकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने तालाब की भूमि को पाटकर खेत बनाया है। हालांकि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके चलते भू राजस्व संहिता की धारा 242 और 253 के तहत उन पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया और तालाब को मूल स्वरूप में लाने का आदेश पारित किया गया।

कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
आदेश की अवहेलना करने पर कलेक्टर अवनीश शरण ने सख्त रुख अपनाते हुए एसडीएम को कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। इस पर एसडीएम पीयूष तिवारी ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन जारी कर तालाब को पुनः उसके मूल स्वरूप में लाने और खर्च की वसूली अनावेदकों से करने का आदेश दिया।

प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से पर्यावरण और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों की सराहना हो रही है। वहीं, तालाब को पाटने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संभावना ने अन्य लोगों के लिए भी एक कड़ा संदेश दिया है।


 

 

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