बिलासपुर। जिले में स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक युक्तियुक्तकरण (Rationalization) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। SC-ST-OBC माइनॉरिटी महासंघ ने पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल तिवारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है।
महासंघ का आरोप है कि बिलासपुर जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से आदेश जारी किए गए, जिससे सैकड़ों शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कई को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
वरिष्ठता सूची में गड़बड़ी, शिक्षकों को नहीं दिया मौका
ज्ञापन में कहा गया है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों की वरिष्ठता सूची का सही मिलान नहीं किया गया और उसमें सुधार के लिए शिक्षकों को पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। इससे कई शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो गई और पूरे सिस्टम में अव्यवस्था की स्थिति बन गई।
देर रात तक काउंसलिंग, मनमाने आदेश
महासंघ ने आरोप लगाया कि काउंसलिंग की सूचना समय पर नहीं दी गई और देर रात तक काउंसलिंग कर मनमाने आदेश जारी किए गए। संगठन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में शासन के नियमों का पालन नहीं किया गया।
मामला पहुंचा हाईकोर्ट
ज्ञापन के अनुसार 489 शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण में गड़बड़ी के कारण 165 से अधिक शिक्षक हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं, जिससे शासन का समय और संसाधन भी बर्बाद हो रहे हैं।
260 से ज्यादा शिक्षकों ने दर्ज कराई आपत्ति
महासंघ का दावा है कि 260 से अधिक शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उन पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया। कई शिक्षक अब भी न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
निलंबन और विभागीय जांच की मांग
महासंघ के प्रदेश प्रमुख सुरेश दिवाकर ने ज्ञापन में कहा है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की है, इसलिए डॉ. अनिल तिवारी को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाए और शिक्षकों के साथ न्याय किया जाए।
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