निगम कमिश्नर प्रकाश सर्वे के राज में दो इंजीनियरिंग! नाली निर्माण में ‘जैसा इंजीनियर, वैसा काम’ क्यों?

MT कंस्ट्रक्शन पर बिजली चोरी कर नाली निर्माण कराए जाने के गंभीर आरोप लग चुके हैं।

“आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे का चहेता है MT कंस्ट्रक्शन?”—सूत्रों के दावे से शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म

वॉर्ड 17 में MT कंस्ट्रक्शन का ठेकेदार महिला इंजीनियर शशि वारे की निगरानी में बिना ड्रॉइंग-डिजाइन के कर रहा नाली निर्माण, गुणवत्ता पर उठे सवाल

कहीं बिना ड्रॉइंग-डिजाइन नाली, कहीं ड्रॉइंग के अनुसार निर्माण… बिलासपुर नगर निगम में आखिर इंजीनियरिंग का एक ही पैमाना है या हर जोन का अपना नियम?

बिलासपुर: नगर निगम की सीमा एक है, सड़कें जनता की हैं, पैसा सरकारी है और निर्माण की जिम्मेदारी भी उसी नगर निगम की है। फिर सवाल यह है कि निर्माण का तरीका अलग-अलग क्यों?

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बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-3 और जोन क्रमांक-7 में वर्तमान में नाली निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन इन दोनों स्थानों पर सामने आ रही कार्यप्रणाली ने नगर निगम की इंजीनियरिंग व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या नगर निगम में नाली निर्माण का कोई एक समान तकनीकी मानक है?

जोन क्रमांक-3 के वार्ड क्रमांक 17 में नाली निर्माण कार्य एमटी कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है। यहां संबंधित इंजीनियर शशि वारे के अनुसार निर्माण कार्य ड्रॉइंग-डिजाइन के बिना कराया जा रहा है। उनका तर्क बताया गया कि उच्च कार्यालय से ही ऐसे कार्य बिना ड्रॉइंग-डिजाइन के प्राप्त होते हैं।

अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए।

जोन क्रमांक-7 के कमिश्नर का कहना है कि वहां नाली निर्माण कार्य ड्रॉइंग-डिजाइन के अनुसार कराया जाता है।

यहीं से असली सवाल पैदा होता है—

एक नगर निगम… दो अलग-अलग इंजीनियरिंग सिस्टम?

अगर ड्रॉइंग-डिजाइन के आधार पर निर्माण करना तकनीकी रूप से आवश्यक है, तो फिर जोन क्रमांक-3 में बिना ड्रॉइंग-डिजाइन निर्माण क्यों?

और अगर बिना ड्रॉइंग-डिजाइन नाली बनाना नियमों और तकनीकी दृष्टि से उचित है, तो फिर जोन क्रमांक-7 में ड्रॉइंग-डिजाइन क्यों?

नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि सही कौन है?

यह मामला किसी एक इंजीनियर या किसी एक ठेकेदार को कटघरे में खड़ा करने का नहीं है। असली सवाल तो सिस्टम का है।

क्योंकि नाली केवल ईंट, सीमेंट और कंक्रीट की संरचना नहीं होती। उसकी चौड़ाई, गहराई, ढाल, जल निकासी की दिशा, कनेक्टिविटी और आसपास की सड़क के लेवल जैसी चीजें भविष्य की जल निकासी व्यवस्था तय करती हैं।

ऐसे में यदि एक स्थान पर तकनीकी ड्रॉइंग-डिजाइन जरूरी समझी जाती है और दूसरे स्थान पर उसके बिना ही काम आगे बढ़ जाता है, तो नगर निगम की तकनीकी एकरूपता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘जैसा इंजीनियर, वैसा काम’—क्या यही है व्यवस्था?

बिलासपुर नगर निगम को यह भ्रम दूर करना चाहिए कि शहर में निर्माण कार्य किसी अधिकारी की व्यक्तिगत कार्यशैली से चलते हैं या नगर निगम के निर्धारित तकनीकी नियमों से।

यदि हर जोन अपनी सुविधा के अनुसार निर्माण पद्धति तय करेगा, तो फिर नगर निगम की केंद्रीय इंजीनियरिंग व्यवस्था का औचित्य क्या है?

और यदि सभी निर्माण कार्यों के लिए एक निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया है, तो उसका पालन सभी जोनों में समान रूप से क्यों नहीं दिखाई देता?

जनता का पैसा है, इसलिए सवाल भी जनता का है

नगर निगम के निर्माण कार्यों में खर्च होने वाला पैसा किसी अधिकारी या ठेकेदार की निजी राशि नहीं है। यह जनता के पैसे से होने वाला निर्माण है।

इसलिए जनता यह जानना चाहती है—

नाली की स्वीकृत ड्रॉइंग कहां है?

तकनीकी स्वीकृति किसने दी?

एस्टिमेट में किस आधार पर लंबाई, चौड़ाई और गहराई निर्धारित की गई?

क्या कार्यादेश में ड्रॉइंग-डिजाइन का उल्लेख है?

क्या साइट पर निर्धारित डिजाइन के अनुसार ही निर्माण हो रहा है?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या नगर निगम के सभी जोनों में नाली निर्माण के लिए एक समान तकनीकी प्रक्रिया लागू है?

इन सवालों का जवाब किसी प्रेस नोट से नहीं, बल्कि स्वीकृत दस्तावेजों और मौके पर हो रहे निर्माण से मिलना चाहिए।

नगर निगम चाहे तो स्थिति बिल्कुल साफ कर सकता है। संबंधित कार्यों की स्वीकृत ड्रॉइंग, तकनीकी स्वीकृति, एस्टिमेट, वर्क ऑर्डर और माप पुस्तिका (MB) सार्वजनिक कर दे।

फिर जनता खुद देख लेगी कि कागज पर क्या स्वीकृत हुआ था और जमीन पर क्या बनाया जा रहा है।

बिलासपुर को नाली नहीं, व्यवस्था चाहिए

शहर विकास का मतलब केवल जगह-जगह नाली बना देना नहीं है। विकास का अर्थ है—योजना के साथ निर्माण, तकनीकी मानक के साथ गुणवत्ता और सरकारी धन के साथ जवाबदेही।

एक ही नगर निगम में यदि एक जोन कहता है—“ड्रॉइंग-डिजाइन के अनुसार काम होता है”, और दूसरा कहता है—“बिना ड्रॉइंग-डिजाइन भी काम आता है”, तो यह विरोधाभास मामूली नहीं है।

क्योंकि सवाल सिर्फ एक नाली का नहीं है।

सवाल यह है कि बिलासपुर में विकास कार्य नियम से चल रहे हैं या व्यवस्था व्यक्ति और जोन के हिसाब से बदल जाती है?

नगर निगम को इस सवाल का जवाब देना ही चाहिए।

क्योंकि जनता को ‘जैसा इंजीनियर, वैसा काम’ नहीं चाहिए—
जनता को चाहिए ‘एक निगम, एक नियम, एक तकनीकी मानक।’

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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