कम लागत, पढ़ाई में लचीलापन, नौकरी के साथ शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं ने बढ़ाया आकर्षण
बिलासपुर। बदलते दौर में उच्च शिक्षा की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। आज की नई पीढ़ी ऐसी शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है, जिसमें पढ़ाई के साथ नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अन्य जिम्मेदारियों को भी आसानी से संतुलित किया जा सके। इसी कारण ओपन एवं मुक्त विश्वविद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
ओपन यूनिवर्सिटी की उपयोगिता और नई पीढ़ी के बीच बढ़ते आकर्षण को लेकर भूपेंद्र श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक, ओपन यूनिवर्सिटी बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ने अपने विचार साझा करते हुए इसके पीछे 10 प्रमुख कारण बताए हैं।
1. कम लागत में शिक्षा
निजी विश्वविद्यालयों की तुलना में ओपन यूनिवर्सिटी में शिक्षा अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध होती है। अध्ययन सामग्री की सुविधा भी विद्यार्थियों को मिलती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह उच्च शिक्षा हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
2. पढ़ाई में लचीलापन
मुक्त शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा आकर्षण इसका लचीलापन है। विद्यार्थी अपनी सुविधा और समय के अनुसार अध्ययन कर सकता है। कामकाजी लोगों के साथ वे विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकते हैं, जो किसी कारण से नियमित कॉलेज नहीं जा पाते।
3. नौकरी के साथ पढ़ाई
आज का युवा पढ़ाई के साथ रोजगार को भी महत्व देता है। ओपन यूनिवर्सिटी की व्यवस्था में नियमित कक्षाओं की बाध्यता अपेक्षाकृत कम होने के कारण विद्यार्थी अपने काम के साथ उच्च शिक्षा जारी रख सकता है। यानी ‘पढ़ाई भी और कमाई भी।’
4. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
बैंकिंग, रेलवे, PSC, UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। डिग्री की पढ़ाई के साथ विद्यार्थी अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय निकाल सकता है।
5. स्किल डेवलपमेंट और वोकेशनल कोर्स
नई पीढ़ी अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि रोजगार से जुड़ी स्किल भी हासिल करना चाहती है। इसी जरूरत को देखते हुए विभिन्न प्रकार के स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल, प्रबंधन और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का महत्व बढ़ा है।
6. डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा
ई-बुक, ई-स्टडी मटेरियल, ई-लाइब्रेरी और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ने मुक्त शिक्षा को नई दिशा दी है। विद्यार्थी मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अध्ययन सामग्री तक पहुंच बना सकता है। इससे शिक्षा पहले की तुलना में अधिक सुलभ हुई है।
7. ‘शिक्षा आपके द्वार’ की अवधारणा
दूरदराज के गांवों और उन क्षेत्रों में, जहां उच्च शिक्षा की सुविधाएं सीमित हैं, मुक्त विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘शिक्षा आपके द्वार’ की अवधारणा ऐसे ही विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने की सोच को दर्शाती है।
8. महामारी जैसे संकट में उपयोगिता
कोरोना महामारी के दौरान जब पारंपरिक शिक्षण संस्थानों की गतिविधियां प्रभावित हुईं, तब ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा की उपयोगिता व्यापक रूप से सामने आई। इस अनुभव ने डिजिटल शिक्षा और वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्थाओं के महत्व को और बढ़ाया।
9. उम्र शिक्षा में बाधा नहीं
मुक्त शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि व्यक्ति जीवन के अलग-अलग चरणों में अपनी शिक्षा जारी रख सकता है। लंबे समय के बाद पढ़ाई शुरू करने वाले वयस्क और कामकाजी लोग भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा हासिल कर सकते हैं, बशर्ते संबंधित कार्यक्रम के प्रवेश नियमों को पूरा करते हों।
10. रुचि और जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम
नई पीढ़ी अपनी रुचि और करियर की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम चुनना चाहती है। मुक्त विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को विकल्प उपलब्ध कराते हैं। सरल और सुलभ अध्ययन सामग्री भी इस व्यवस्था की उपयोगिता बढ़ाती है।
बिलासपुर में PSSOU ने मुक्त शिक्षा को दी नई पहचान
बिलासपुर स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन प्रवेश, ई-बुक, ई-लाइब्रेरी और ई-लर्निंग जैसी सुविधाओं ने विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया है।
बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी बदल रहा है। आज विद्यार्थी केवल यह नहीं देख रहा कि ‘कहां पढ़ना है’, बल्कि यह भी देख रहा है कि ‘अपनी परिस्थितियों के साथ पढ़ाई को कैसे जारी रखा जाए।’ यही बदलाव ओपन यूनिवर्सिटी को नई पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण शिक्षा विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है।







