बिलासपुर मियावाकी वन: एसईसीएल ने लगाए 15,000 पौधे, शहर को मिला पहला सघन हरित वन

बिलासपुर। बिलासपुर मियावाकी वन परियोजना के तहत साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कोनी स्थित नवीन संभागायुक्त कार्यालय के पीछे लगभग 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से 15,000 पौधों का वृहद् वृक्षारोपण किया। यह अभियान कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा एक ही दिन में सर्वाधिक पौधारोपण कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के राष्ट्रव्यापी प्रयास का हिस्सा है।

जानकारी के अनुसार, यह परियोजना बिलासपुर शहर का पहला मियावाकी वन मानी जा रही है। मियावाकी तकनीक के माध्यम से विकसित होने वाला यह सघन शहरी वन आने वाले वर्षों में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण, कार्बन अवशोषण और स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

क्या है मियावाकी पद्धति?

मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई एक विशेष तकनीक है। इसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधों को कम दूरी पर घनी संख्या में लगाया जाता है, जिससे सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में वन कई गुना तेजी से विकसित होता है। इस पद्धति से तैयार वन कम समय में घना, आत्मनिर्भर और जैव विविधता से समृद्ध बन जाता है। यही कारण है कि देश के कई शहरों में शहरी हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए इस तकनीक को अपनाया जा रहा है।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

वृक्षारोपण कार्यक्रम में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन, बिलासपुर संभाग के आयुक्त सुनील कुमार जैन, निदेशक (एचआर) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक तकनीकी (योजना एवं परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र, कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक के. राजशेखर, महाप्रबंधक (पर्यावरण) संजय सिन्हा सहित कंपनी के विभागाध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने स्वयं पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश दिया।

पर्यावरण संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: हरीश दुहन

इस अवसर पर एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल संस्थाओं या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि मियावाकी पद्धति से विकसित किए जा रहे सघन वन भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

एसईसीएल का लक्ष्य 3.20 लाख पौधों का वृक्षारोपण

एसईसीएल के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड के राष्ट्रव्यापी हरित अभियान के तहत कंपनी अपने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में 3.20 लाख से अधिक पौधों का वृक्षारोपण कर रही है। इस अभियान का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक स्वच्छ एवं हरित वातावरण उपलब्ध कराना है।

बिलासपुर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

विशेषज्ञों के अनुसार, बिलासपुर मियावाकी वन परियोजना शहर के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे सघन वन प्रदूषण नियंत्रण, तापमान में कमी, पक्षियों और अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने तथा लोगों को हरित वातावरण देने में सहायक होंगे।

यदि इस प्रकार की परियोजनाओं का विस्तार शहर के अन्य क्षेत्रों में भी किया जाता है, तो भविष्य में बिलासपुर का हरित क्षेत्र उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसे अभियान दीर्घकालिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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