बिलासपुर प्रेस क्लब में सम्मान समारोह, राष्ट्रपति द्वारा प्रदान की जाएगी प्रतिष्ठित फेलोशिप
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और रायगढ़ कथक घराने की गौरवशाली परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान मिलने जा रहा है। रायगढ़ घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक, पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ कथकाचार्य पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप “अकादमी रत्न” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान स्वयं भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।
यह केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस सांस्कृतिक विरासत का राष्ट्रीय अभिनंदन है जिसने दशकों से कथक की परंपरा को जीवंत रखा है। रायगढ़ की धरती पर जन्मे पंडित रामलाल बरेठ ने राजा चक्रधर सिंह और अपने पिता पंडित कार्तिक राम के सान्निध्य में कथक की शिक्षा ग्रहण की तथा अपनी अथक साधना से रायगढ़ घराने को देश-दुनिया के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया।
कला की इस यात्रा में उन्होंने न केवल स्वयं की पहचान बनाई, बल्कि हजारों शिष्यों को प्रशिक्षित कर कथक की मशाल अगली पीढ़ियों तक पहुंचाई। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर और चक्रधर नृत्य केंद्र में तीन दशकों तक गुरु के रूप में सेवा देते हुए उन्होंने कथक की अमूल्य परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, चक्रधर सम्मान और शिखर सम्मान जैसे अनेक राष्ट्रीय अलंकरणों से विभूषित पंडित बरेठ के लिए “अकादमी रत्न” सम्मान उनके कला जीवन का स्वर्णिम अध्याय माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ ने रायगढ़ घराने को वैश्विक पहचान दिलाने में अद्वितीय योगदान दिया है। उनकी चार पीढ़ियां आज भी इस परंपरा के ध्वजवाहक के रूप में कार्य कर रही हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
वहीं पूर्व आईएसएस अधिकारी डॉ. रमेशचंद्र श्रीवास्तव ने इसे छत्तीसगढ़, बिलासपुर और रायगढ़ की सांस्कृतिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि पंडित बरेठ की कला साधना निरंतर नए इतिहास रच रही है।
पंडित रामलाल बरेठ के पुत्र एवं प्रसिद्ध कथक गुरु भूपेंद्र बरेठ ने कहा कि यह सम्मान उनके पिता की दशकों लंबी तपस्या, समर्पण और कला के प्रति निष्ठा का प्रतिफल है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस उपलब्धि से रायगढ़ घराने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।
“जब साधना इतिहास बनती है, तब राष्ट्र उसे ‘अकादमी रत्न’ कहकर सम्मानित करता है — पंडित रामलाल बरेठ उसी विरासत का नाम हैं।”















