जहां प्रचार नहीं, वहां भी प्रेरणा हो सकती है… बिलासपुर में कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की सादगी भरी कार्यशैली चर्चा का विषय बन रही है।
बिलासपुर। आज के दौर में जहां छोटी-छोटी पहल भी सोशल मीडिया की सुर्खियां बन जाती हैं, वहीं बिलासपुर प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारी चुपचाप एक ऐसी कार्यशैली अपना रहे हैं, जिसकी चर्चा कम लेकिन संदेश बड़ा है।
जानकारी के अनुसार बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल इन दिनों विभिन्न शासकीय दौरों के दौरान एक ही वाहन का उपयोग कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस पहल का कहीं कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है। न सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की गईं, न ही इसे लेकर कोई विशेष प्रचार किया गया।
न्यूज़ हब इनसाइट को इसकी जानकारी तब मिली जब जिला पंचायत परिसर में सीईओ का शासकीय वाहन खड़ा मिला। जानकारी लेने पर पता चला कि कलेक्टर और सीईओ संयुक्त दौरों के दौरान एक ही वाहन से क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं।
प्रशासनिक गलियारों में इसे केवल एक वाहन साझा करने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, ईंधन की बचत और समन्वित कार्य संस्कृति के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि पूर्व में कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने साइकिल चलाने, पैदल चलने या अन्य जनहित पहलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर व्यापक चर्चा बटोरी थी। यदि चाहें तो बिलासपुर के ये दोनों अधिकारी भी इस पहल को प्रचारित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यही कारण है कि यह पहल अब तक आम लोगों की नजरों से लगभग दूर रही।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जब दो वरिष्ठ अधिकारी एक साथ दौरे पर निकलते हैं तो न केवल समय की बचत होती है, बल्कि मौके पर योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा भी अधिक प्रभावी ढंग से हो पाती है। साथ ही अनावश्यक वाहन उपयोग कम होने से सरकारी खर्च में भी कमी आती है।
बिना किसी शोर-शराबे और प्रचार के अपनाई गई यह कार्यशैली एक संदेश जरूर देती है कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यवहारिक निर्णयों से भी दिखाई देता है।















