बिलासपुर: श्रीकांत वर्मा की 40वीं पुण्यतिथि पर बिलासपुर ने अपने इस गौरवशाली साहित्यिक व्यक्तित्व को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर में उनकी आदमकद प्रतिमा के समक्ष नागरिकों, साहित्य प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
इस अवसर पर शिव सेना जिला अध्यक्ष महिला रेवती यादव ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि श्रीकांत वर्मा केवल कवि नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य में आधुनिक चेतना के सबसे प्रखर हस्ताक्षरों में से एक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सत्ता, समाज, अकेलेपन और मानवीय पीड़ा को जिस तीखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि “नई कविता” आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे श्रीकांत वर्मा ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और नई भाषा दी। उनकी चर्चित कृतियां — भटका मेघ, मायादर्पण, दिनारम्भ, जलसाघर और विशेष रूप से मगध — आज भी साहित्य जगत में मील का पत्थर मानी जाती हैं। मगध के लिए उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि साहित्य के साथ-साथ उनका योगदान पत्रकारिता और राजनीति में भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने दिनमान और श्रमिक जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कार्य किया तथा राज्यसभा सदस्य के रूप में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
बिलासपुर से उनके गहरे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा गया कि शहर में उनके नाम पर बना “श्रीकांत वर्मा मार्ग” और पोस्ट ऑफिस के सामने स्थापित उनकी प्रतिमा, शहर के प्रति उनके आत्मीय संबंध की पहचान है।
शिव सेना नेताओं ने कहा कि जब भी उनके परिवार का बिलासपुर आगमन होता है, तब शहर के प्रति उनका आत्मीय लगाव स्पष्ट दिखाई देता है।
अंत में शिव सेना परिवार एवं उपस्थित नागरिकों ने महान साहित्यकार को नमन करते हुए कहा कि श्रीकांत वर्मा का साहित्य आने वाली पीढ़ियों को हमेशा सच बोलने और समाज को आईना दिखाने की प्रेरणा देता रहेगा।















