राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पर राष्ट्रीय मंथन: बिलासपुर में हुआ गौरव ग्रंथ का भव्य विमोचन, विद्वानों ने कहा— अब समय है राष्ट्रीय विमर्श को शिक्षा नीति से जोड़ने का

बिलासपुर। साहित्य, राष्ट्रचेतना और हिंदी की समृद्ध परंपरा को समर्पित एक ऐतिहासिक आयोजन में बिलासपुर का साहित्यिक वातावरण उस समय गौरव और वैचारिक ऊर्जा से भर उठा, जब प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी (राष्ट्रीय समिति) एवं गहोई वैश्य समाज, बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पर आधारित “गौरव ग्रंथ” का भव्य विमोचन एवं राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया।

शासकीय जे.पी. वर्मा कला एवं वाणिज्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में आयोजित इस गरिमामय समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डॉ. चन्द्र भूषण वाजपेयी, अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक तथा विशिष्ट अतिथियों ने राष्ट्रकवि के साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य अतिथि डॉ. चन्द्र भूषण वाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने खड़ी बोली हिंदी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपने महाकाव्यों, खंडकाव्यों व गीतों के माध्यम से हिंदी साहित्य की मजबूत आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक चेतना को समर्पित रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में जोरदार टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रकवि द्वारा स्थापित राष्ट्रीय विमर्श की विचारधारा को अब नई शिक्षा नीति और समकालीन चिंतन में शामिल करने का समय आ गया है। उन्होंने समीक्षात्मक दृष्टि से कहा कि वर्षों तक साहित्यिक वादों को प्राथमिकता देकर राष्ट्रवादी चेतना को हाशिए पर रखा गया, जिसकी पुनर्समीक्षा आवश्यक है।

इस अवसर पर गौरव ग्रंथ के संपादक मनोहर लाल बरसैंया ने पुस्तक की संकल्पना से लेकर उसके निर्माण तक के संघर्ष और शोध यात्रा को साझा किया। वहीं डॉ. श्याम लाल निराला ने इसे राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण साहित्यिक धरोहर बताते हुए संपादक मंडल को बधाई दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। डॉ. किरण राठौर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और राष्ट्रकवि के गीतों ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।

समारोह में राष्ट्रकवि की पुस्तकों की प्रदर्शनी एवं बिक्री भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसे श्री बुक डिपो के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनोद कुमार गुप्त ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन राजकुमार बरसैंया ने किया।

इस साहित्यिक आयोजन में बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता और राष्ट्रीय गरिमा प्रदान की। साहित्य प्रेमियों ने इसे बिलासपुर के सांस्कृतिक इतिहास का एक यादगार अध्याय बताया।

उक्त जानकारी प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी (राष्ट्रीय समिति) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने दी।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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