बिलासपुर: “सूचना छुपाने, अधूरी जानकारी देने और नियमों की आड़ लेने” के आरोपों से जिला जनसंपर्क कार्यालय के जनसूचना अधिकारी मुनूदाउ पटेल (उप संचालक) चर्चा में

RTI के दो मामलों में जनसूचना अधिकारी मुनूदाउ पटेल (उप संचालक) की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, आदेशों ने मचाया हड़कम्प

RTI का बड़ा धमाका! पत्रकारों के सत्कार में मुनूदाउ पटेल के कार्यकाल में 3 लाख 39 हजार 303 रुपये खर्च होने का खुलासा

बिलासपुर। जिला जनसंपर्क कार्यालय बिलासपुर में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।एक पत्रकार द्वारा दायर दो अलग-अलग प्रथम अपील प्रकरणों में जनसूचना अधिकारी मुनूदाउ पटेल (उप संचालक)  की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश सामने आने के बाद विभाग में हड़कम्प मच गया है।

मामला सिर्फ सूचना देने या न देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी आयोजनों में पत्रकारों पर हुए खर्च, बिल-वाउचर, न्यूज़ एजेंसियों की भूमिका, कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति और विभागीय पारदर्शिता जैसे कई संवेदनशील मुद्दे जुड़ गए हैं।

पत्रकारों पर खर्च का हिसाब मांगते ही मचा बवाल

पहले प्रकरण में पंकज खंडेलवाल ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान शासकीय कार्यक्रमों एवं आयोजनों में पत्रकारों और अन्य लोगों के लिए कराए गए नाश्ता, चाय और भोजन के खर्च से संबंधित बिल-वाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।

लेकिन जनसूचना अधिकारी मुनूदाउ पटेल (उप संचालक) की ओर से जवाब दिया गया कि पत्रकारों और अन्य लोगों की अलग-अलग परिभाषा नहीं है तथा बिल-वाउचर में संबंधित प्रतिष्ठानों के बैंक खाते की जानकारी होने के कारण यह निजी सूचना की श्रेणी में आता है।

यहीं से विवाद भड़क गया। अपीलकर्ता ने आरोप लगाया कि विभाग जानबूझकर जानकारी छुपा रहा है और RTI कानून की गलत व्याख्या कर रहा है।

“अपूर्ण और भ्रामक जानकारी” का आरोप

अपील में यह भी कहा गया कि जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी अधूरी, भ्रामक और सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है।

आदेश में यह सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में पत्रकार सत्कार के लिए 3 लाख 83 हजार 808 रुपये स्वीकृत हुए थे, जबकि 3 लाख 39 हजार 303 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बिल-वाउचर की प्रतियां देने से इनकार कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी पैसों से हुए खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

न्यूज़ एजेंसी और कंप्यूटर ऑपरेटरों पर भी घिरा विभाग

दूसरे प्रकरण में पत्रकार ने जिला जनसंपर्क कार्यालय में कार्यरत न्यूज़ सर्विस, न्यूज़ एजेंसी और आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटरों से संबंधित अभिलेख मांगे थे।

जनसूचना अधिकारी मुनूदाउ पटेल (उप संचालक) ने जवाब दिया कि यह जानकारी “तृतीय पक्ष” से संबंधित है और सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत नहीं दी जा सकती।

लेकिन सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों का रिकॉर्ड विभाग के पास व्यवस्थित रूप से उपलब्ध ही नहीं है, क्योंकि नियुक्ति कथित रूप से संबंधित न्यूज़ एजेंसी द्वारा की जाती है।

यहीं से मामला और गर्मा गया। सवाल उठने लगे कि यदि विभाग में कार्य करने वाले कर्मियों का रिकॉर्ड ही स्पष्ट नहीं है, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?

अपीलीय अधिकारी ने दिए निर्देश, विभाग में बेचैनी

प्रथम अपीलीय अधिकारी संजीव तिवारी ने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला जनसंपर्क कार्यालय बिलासपुर को स्वीकृत न्यूज़ एजेंसियों के नाम अपीलकर्ता को उपलब्ध कराए जाएं।

आदेश के बाद जनसंपर्क विभाग में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार अब विभागीय रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और एजेंसियों की भूमिका को लेकर अंदरूनी स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

बड़ा सवाल — पारदर्शिता या पर्दादारी?

-इन दोनों प्रकरणों ने सरकारी सूचना तंत्र की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
-क्या सरकारी खर्च से जुड़े बिल-वाउचर सार्वजनिक नहीं होने चाहिए?
-क्या विभाग के भीतर काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना चाहिए?
-और सबसे बड़ा सवाल — क्या RTI मांगने वालों को तकनीकी धाराओं में उलझाकर जानकारी रोकी जा रही है?

फिलहाल इन सवालों ने जिला जनसंपर्क कार्यालय में हलचल मचा दी है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता

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