ओंकारेश्वर महादेव मंदिर परिसर बना ऐतिहासिक क्षण का साक्षी, जब नवरात्रि की अष्टमी पर संत परंपरा को नई ऊर्जा मिली।
बिलासपुर। नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के शुभम विहार स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर में अष्टमी के दिन भक्ति, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां डॉ. विनय कुमार पाठक (कुलपति, थावे विद्यापीठ एवं पूर्व अध्यक्ष, राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़) के करकमलों से महान संत कवि गोस्वामी तुलसीदास की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया।
“साहित्य और श्रद्धा का नया केंद्र बनेगा मंदिर”
डॉ. पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि बिलासपुर में वर्षों से तुलसीदास जी की प्रतिमा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब यह सपना साकार होने के बाद यहां साहित्यिक गतिविधियों, संगोष्ठियों और सांस्कृतिक आयोजनों को नया आयाम मिलेगा।
“लंबी प्रतीक्षा के बाद मिला ऐतिहासिक क्षण”
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षण मंदिर परिवार और शहरवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में तुलसी जयंती जैसे आयोजनों से यह परिसर सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा।
गणमान्यजनों ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में पंकज खंडेलवाल, डॉ. विष्णु कुमार तिवारी, डॉ. गजेंद्र तिवारी सहित कई प्रमुख लोगों ने अपने विचार साझा किए और इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक आयोजन में समाजसेवियों, साहित्यकारों, कायस्थ समाज के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
सागा ले आउट में तुलसीदास की प्रतिमा का अनावरण सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह स्थान भक्ति के साथ-साथ बौद्धिक विमर्श का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।















