बिलासपुर: गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में गूंजा इतिहास: “सम्राट अशोक” नाटक ने मोहा दर्शकों का मन

बिलासपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के नटराज कला मंच पर इतिहास जीवंत हो उठा, जब प्रसिद्ध साहित्यकार दया प्रकाश सिन्हा द्वारा रचित ऐतिहासिक नाटक “सम्राट अशोक” का शानदार मंचन किया गया। शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इस नाट्य प्रदर्शन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

यह प्रस्तुति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई, जबकि निर्देशन की कमान विभाग के सहायक प्राध्यापक गुरनाम ने संभाली।

नाटक में महान सम्राट अशोक के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं—आंतरिक द्वंद्व, युद्ध की भयावहता और अंततः अहिंसा व धम्म की ओर उनके परिवर्तन—को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के दमदार अभिनय, आकर्षक मंच सज्जा, सटीक प्रकाश व्यवस्था और जीवंत संगीत ने दर्शकों को बांधे रखा।

मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार
अशोक — राहुल राज तिवारी
देवी — अनुराधा कुमारी, प्रज्ञा
दासी — नैना कुमारी
महामंत्री राधा गुप्ता — नितीश कुमार कौशिक
बिंदुसार/बौद्ध भिक्षु — हितेश कुमार महंता
तिष्यरक्षिता — स्वयंप्रभा बिशी
सैनिक — आदित्य सैनी सहित अन्य कलाकारों ने भी प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

बैकस्टेज टीम का रहा अहम योगदान
प्रॉपर्टी डिजाइन से लेकर कॉस्ट्यूम, म्यूजिक और लॉजिस्टिक्स तक, पूरी टीम ने समर्पण के साथ इस नाटक को सफल बनाया। लाइव म्यूजिक ईशान खरे द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने प्रस्तुति में नई ऊर्जा भर दी।

निर्देशक गुरनाम का संदेश
निर्देशक ने बताया कि यह नाटक केवल ऐतिहासिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए शांति, करुणा और मानवता का संदेश है। उन्होंने सभी प्रोफेसरों, शोधार्थियों और सहयोगियों का आभार जताया, जिनके प्रयास से यह मंचन सफल हो सका।

सांस्कृतिक समृद्धि की ओर कदम
यह नाट्य प्रस्तुति न केवल विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करने में सफल रही, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

 कुल मिलाकर, “सम्राट अशोक” का यह मंचन दर्शकों के लिए एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव बन गया।

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