“संकल्प 2026: विकास का विज़न या वोट का समीकरण?”

छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जब 1.72 लाख करोड़ का बजट पेश किया, तो साफ था कि यह सिर्फ आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह बजट “SANKALP” थीम के साथ आया है — यानी वादों को जमीन तक पहुंचाने का दावा।

अब सीधे मुद्दे पर आते हैं — यह बजट छत्तीसगढ़ वासियों के लिए कितना फायदेमंद और कितना जोखिम भरा है? 

किसान: सरकार का सबसे बड़ा दांव

  • कृषक उन्नति योजना – ₹10,000 करोड़
  • मुफ्त बिजली – ₹5,500 करोड़
  • फसल बीमा – ₹820 करोड़

 संदेश साफ है: ग्रामीण वोट बैंक और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना प्राथमिकता है।

धांसू पॉइंट: खेती को इनपुट सपोर्ट मिल रहा है।
कमजोर कड़ी: MSP, मार्केट लिंक और वैल्यू एडिशन पर बड़ा संरचनात्मक सुधार नजर नहीं आता। 

महिला: भावनात्मक और आर्थिक दोनों कार्ड

  • महतारी वंदन – ₹8,200 करोड़
  • संपत्ति रजिस्ट्रेशन में 50% छूट
  • बालिका को 18 वर्ष पर ₹1.5 लाख

 यह सीधा सामाजिक सुरक्षा और राजनीतिक मजबूती का मिश्रण है।

फायदा: महिला वर्ग में आर्थिक भरोसा।
सवाल: क्या यह योजनाएं आत्मनिर्भरता बढ़ाएँगी या केवल सहायता तक सीमित रहेंगी?

युवा और टेक्नोलॉजी: भविष्य की तैयारी?

  • AI मिशन
  • स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन
  • CG ACE (प्रतियोगी परीक्षा सहायता)
  • नए मेडिकल कॉलेज, ITI

-पहली बार बजट में “AI” और “स्टार्टअप” शब्दों को गंभीरता से जगह मिली है।

धांसू संकेत: राज्य टेक इकोनॉमी की ओर बढ़ना चाहता है।
चुनौती: प्राइवेट सेक्टर जॉब ग्रोथ का ठोस डेटा या निवेश प्रतिबद्धता स्पष्ट नहीं।

इंफ्रास्ट्रक्चर: अच्छा लेकिन और तेज़ चाहिए

पूंजीगत व्यय ₹26,500 करोड़ है।
लेकिन बजट अनुपात 15.4% — पिछले साल से थोड़ा कम।

– यानी सड़क, पुल, बैराज, एयरपोर्ट पर खर्च है, पर “विकास की स्पीड” और बढ़ सकती थी।

वित्तीय स्थिति: संतुलित लेकिन दबाव में

  • राजकोषीय घाटा – 2.87% (FRBM सीमा के भीतर)
  • राजस्व घाटा – ₹2,000 करोड़

 -अभी स्थिति नियंत्रण में है।
– लेकिन लगातार सब्सिडी आधारित मॉडल भविष्य में दबाव बना सकता है।

बस्तर-सरगुजा फोकस: विकास + रणनीति

  • शिक्षा सिटी (अबूझमाड़)
  • बैराज निर्माण
  • अतिरिक्त पोषण सहायता

– यह सिर्फ बजट नहीं, सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा रणनीति भी है.

बड़ा सवाल

यह बजट “लोककल्याण + विकास” का मिश्रण है।

यह न पूरी तरह चुनावी है, न पूरी तरह सुधारवादी।

– अगर क्रियान्वयन तेज और पारदर्शी रहा तो यह बजट छत्तीसगढ़ को 2047 विज़न की राह पर मजबूत कर सकता है।
– लेकिन यदि योजनाएं घोषणाओं तक सीमित रहीं तो यह बजट “सब्सिडी विस्तार” बनकर रह जाएगा।

सच यही है — संकल्प का असली इम्तिहान जमीन पर होगा, सदन में नहीं।

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