अमरकंटक की आस्था गड्ढों में दबी: जर्जर सड़कों पर मजबूर श्रद्धालु, PWD ईई नित्या ठाकुर और PMGSY ईई अनंत दीक्षित सवालों के घेरे में

मुख्यमंत्री जी! ठेकेदारों से गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य नहीं करा पाने वाले जीपीएम जिले के जिम्मेदार PWD के ईई नित्या ठाकुर और PMGSY के ईई अनंत साहू का तत्काल ट्रांसफर करें 

जीपीएम। एक ओर अमरकंटक को आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर पेंड्रा से अमरकंटक जाने वाली दोनों प्रमुख सड़कें बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। श्रद्धा की इस राह पर सफर करना अब जोखिम भरा हो चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं टूटी है।

पेंड्रा से अमरकंटक जाने के लिए दो मुख्य मार्ग हैं—
पेंड्रा–जलेश्वर मार्ग
पेंड्रा–दुर्गाधारा मार्ग

 जलेश्वर मार्ग: चुकतापानी के बाद हालात बद से बदतर

स्थानीय लोगों के अनुसार पेंड्रा से चुकतापानी तक सड़क किसी तरह ठीक-ठाक है, लेकिन इसके आगे हालात इतने खराब हैं कि वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़क और उखड़ी डामर पर रोज़ाना सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।
यह मार्ग PWD पेंड्रा–गौरेला–मरवाही जिले के अंतर्गत आता है।

 दुर्गाधारा मार्ग: दो विभाग, एक जैसी बदहाली

पेंड्रा से दुर्गाधारा होते हुए अमरकंटक जाने वाली सड़क का हाल भी अलग नहीं है। इस मार्ग का कुछ हिस्सा PWD और कुछ हिस्सा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधीन है, लेकिन जिम्मेदारी बंटी, जवाबदेही गायब नज़र आ रही है।

 सालों से जर्जर, शिकायतें बेअसर

क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि यह सड़क पिछले कई वर्षों से इसी तरह जर्जर हालत में है, लेकिन मरम्मत और पुनर्निर्माण सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गया है। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक शिकायतें पहुंची, पर जमीन पर काम नजर नहीं आया।

 सवालों के घेरे में अधिकारी

जीपीएम जिले में PWD के कार्यपालन अभियंता नित्या ठाकुर और PMGSY के कार्यपालन अभियंता दीक्षित हैं, लेकिन सवाल यह है कि
– क्या अधिकारियों को अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं की परेशानी दिखाई नहीं देती?
 -या फिर आस्था और पर्यटन से जुड़ा यह मार्ग विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गया है?

 श्रद्धालु और पर्यटक परेशान

खराब सड़कों के कारण अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वाहन खराब हो जाते हैं, तो कभी दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

 बड़ा सवाल

जब अमरकंटक जैसे पवित्र और अंतरराज्यीय पर्यटन स्थल की सड़कें ही बदहाल हैं, तो विकास के दावे आखिर किसके लिए किए जा रहे हैं?

अब देखना यह होगा कि PWD और PMGSY के जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और कब आस्था की इस राह को गड्ढों से मुक्ति मिलती है।

  • Related Posts

    CG: सदन में गूंजा 100 एकड़ का मामला, लेकिन बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की विज्ञप्ति में ये बड़े सवाल गायब!

    बिलासपुर। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाया गया जमीन फर्जीवाड़ा मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। विधायक ने नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश (TCP) और राजस्व विभाग के अफसरों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। करीब 100 एकड़ जमीन पर टुकड़ों में ले-आउट पास कराने और सेवाभूमि को EWS के नाम पर स्वीकृत करने की बात कही। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 50 शिकायतों की पुष्टि की और जांच कमेटी गठन का आश्वासन दिया।…

    Continue reading
    “संकल्प 2026: विकास का विज़न या वोट का समीकरण?”

    छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जब 1.72 लाख करोड़ का बजट पेश किया, तो साफ था कि यह सिर्फ आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह बजट “SANKALP” थीम के साथ आया है — यानी वादों को जमीन तक पहुंचाने का दावा। अब सीधे मुद्दे पर आते हैं — यह बजट छत्तीसगढ़ वासियों के लिए कितना फायदेमंद और कितना जोखिम भरा है?  किसान: सरकार का सबसे बड़ा दांव…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *