बिलासपुर: टुटपुंजिया दलाल नरेंद्र मोटवानी केस — क्या शातिर तहसीलदार, आरआई और पटवारी की मिलीभगत के बिना मुमकिन था ये फर्जीवाड़ा?

फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले शातिर तहसीलदार, आरआई और पटवारी को भी भेजना चाहिए जेल 

बिलासपुर: तोरवा क्षेत्र में जमीन संबंधी एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। तोरवा निवासी मीना गंगवानी द्वारा की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नरेंद्र मोटवानी, डुलाराम मोटवानी, महेंद्र मोटवानी और राजेन्द्र मोटवानी के खिलाफ IPC की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया है।

आरोप है कि इन दलालों ने जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन का अवैध हस्तांतरण करने की कोशिश की, जिससे पीड़िता को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा। दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र था।

इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह फर्जीवाड़ा राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव था? तहसीलदार, आर.आई. और पटवारी की भूमिका संदेह के घेरे में है।

हमारा मानना है कि जमीन दलाल इतने बड़े स्तर पर जाली दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पने की साजिश बिना राजस्व अमले के सहयोग के नहीं कर सकते। इसलिए आवश्यक है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जाए।

वर्तमान में पुलिस द्वारा जांच जारी है और इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं। पीड़िता को न्याय दिलाने और ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की निष्पक्षता और सख्ती अब अग्निपरीक्षा में है।

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