पूर्व न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी एवं डॉ. ओमप्रकाश बिरथरे के जन्मोत्सव पर वैदिक संस्कार, साहित्य और सम्मान का अनूठा संगम
बिलासपुर। जन्मदिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों, संस्कारों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है। इसी भाव को साकार करते हुए बिलासपुर में पूर्व न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी एवं बुनियादी प्रशिक्षण संस्था के पूर्व प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश बिरथरे का जन्मदिवस भारतीय एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप उनके निवास पर गरिमामय वातावरण में मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पंचतत्व पूजन, दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यिक अभिव्यक्तियों से सजे इस आयोजन में आध्यात्मिक चेतना के साथ न्याय, संस्कार और साहित्य के प्रति सम्मान भी देखने को मिला।
वैदिक मंत्रों से हुआ शुभारंभ, पंचतत्वों के प्रति जताई कृतज्ञता
कार्यक्रम का शुभारंभ वेदमंत्रों के उच्चारण और उपस्थित सदस्यों के स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद पवित्रीकरण एवं देवपूजन किया गया। जन्मदिवस उत्सव के अंतर्गत पूर्व न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी और डॉ. ओमप्रकाश बिरथरे ने पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु—इन पंचतत्वों का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम में आचार्य की भूमिका निभा रहे ओमप्रकाश भट्ट ने वैदिक परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवन के लिए खानपान तथा दिनचर्या में शुद्धता आवश्यक है। अभक्ष्य पदार्थों और फास्ट फूड से बचने, शुद्ध जल एवं स्वच्छ वायु का सेवन करने तथा सकारात्मक विचारों के लिए अच्छे साहित्य का अध्ययन करने पर जोर दिया गया। उन्होंने व्यक्तित्व को तेजस्वी बनाने और जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाने का संदेश भी दिया।
इसके पश्चात पंचदेव पूजन और पंचदीप प्रज्ज्वलन किया गया। दीपों के माध्यम से ज्ञान, सद्भाव, सकारात्मकता और जीवन में प्रकाश बनाए रखने का संदेश दिया गया। परिवारजनों एवं मित्रों ने पुष्पवर्षा कर दोनों विभूतियों को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। वैदिक विधि से संपन्न इस आयोजन ने उपस्थित लोगों को आत्मिक आनंद और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
काव्य गोष्ठी में शब्दों से सजी शुभकामनाएं
समारोह के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें साहित्यकारों ने दोनों विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को शब्दों के माध्यम से सम्मानित किया।
कवि ओमप्रकाश भट्ट ने डॉ. ओमप्रकाश बिरथरे के जन्मदिवस पर मंगलकामना व्यक्त करते हुए अपनी पंक्तियों में कहा—
“जन्मदिवस पर यही कामना जीवन में मधुमास रहे।
स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें आप, मुख पर सदा उल्लास रहे।”
कविता के माध्यम से उनके स्वस्थ, प्रसन्न और सुखमय जीवन की कामना की गई।
न्याय, निष्पक्षता और मानवीय मूल्यों को कविताओं में मिला सम्मान
पूर्व न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित काव्य प्रस्तुतियों में उनके न्यायिक जीवन, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार विजय तिवारी ने कहा कि न्यायाधीश के रूप में वाजपेयी ने अनेक परिवारों को न्याय दिलाकर उनके जीवन में खुशियों का दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने अपनी पंक्तियों में कहा—
“सोंधी खुशबू हो माटी की,
ध्रुव तारा जैसे अंबर के।
उत्तुंग लहर हो सागर की,
दीपक जाने कितने घर के।”
वरिष्ठ सजलकार अमृत पाठक ने माता-पिता और पूर्वजों के संस्कारों तथा आशीर्वाद को जीवन की उपलब्धियों का आधार बताया। उन्होंने अपनी काव्य पंक्तियों के माध्यम से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त किया।
कवि ओमप्रकाश भट्ट ने न्यायमूर्ति वाजपेयी की न्यायनिष्ठा और निष्पक्षता को रेखांकित करते हुए कहा—
“न्यायपीठ पर बैठकर आपने न्याय धर्म का मान बढ़ाया।
न्याय और निष्पक्षता का पथ अपने कर्मों से दिखलाया।”
वहीं वरिष्ठ साहित्यकार बुधराम यादव ने न्यायमूर्ति के कार्यकाल में जटिल विवादों के समाधान और पीड़ितों की फरियाद सुनने के भाव को अपनी कविता में अभिव्यक्त किया—
“तन्मयता से सब सुनीं,
दीन-दुखी फरियाद।
समाधान दे हल किए,
अनगिन जटिल विवाद।”
इन काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से न्याय, ईमानदारी, निष्पक्षता और मानवीय संवेदनाओं के महत्व को रेखांकित किया गया। साहित्यकारों ने अपने शब्दों से दोनों विभूतियों के प्रति सम्मान और मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेयी ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार विजय तिवारी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। इस अवसर पर परिवारजनों, मित्रों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
यह आयोजन जन्मदिवस को केवल औपचारिक बधाई तक सीमित रखने के बजाय भारतीय परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, साहित्यिक चेतना और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास रहा। वैदिक मंत्रों से लेकर काव्यांजलि तक, पूरे कार्यक्रम में संस्कार, सम्मान और सकारात्मक जीवन-दृष्टि की झलक दिखाई दी।







