छत्तीसगढ़ी के सम्मान में अब देरी नहीं चलेगी — राजभाषा आयोग में जल्द हो नियुक्ति की मांग, बोले छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक ने राज्य सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अब बिना किसी देरी के की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के पूरे पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद आयोग निष्क्रिय रहा, जिससे छत्तीसगढ़ी भाषा और उसकी गरिमा को ठेस पहुँची है।

तरुण कौशिक ने कहा कि राज्य की आत्मा उसकी मातृभाषा में बसती है, और छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी छत्तीसगढ़ी भाषा है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिला था। बावजूद इसके, आज तक छत्तीसगढ़ी को वह राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिसकी वह सच्ची हकदार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राजभाषा आयोग को निष्क्रिय रखकर छत्तीसगढ़ी भाषा के साथ अन्याय किया। अब जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारा दिया है “हमने बनाया है, हम हीं संवारेंगे”, तो यह समय इस नारे को सार्थक करने का है।

कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसे व्यक्ति को आयोग का अध्यक्ष बनाना चाहिए जो छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति न केवल भावनात्मक लगाव रखता हो बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की क्षमता भी रखता हो।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब छत्तीसगढ़ सरकार को मातृभाषा के सम्मान की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान को नई ऊँचाई मिल सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे जल्द से जल्द राजभाषा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करें, जिससे छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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