छत्तीसगढ़ की धरती पर नृत्य का जादू: श्री डांस एकेडमी उसलापुर के बच्चों ने भिलाई में लहराया परचम!

भिलाई। नृयाधाम कला समिति देशराग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में बिलासपुर की श्री डांस एकेडमी, उसलापुर के नन्हें कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर जिले का नाम रोशन किया।

इस प्रतियोगिता में सोलो परफॉर्मेंस (एकल नृत्य) के अंतर्गत वन्या कौशिक, सुपुत्री मधु कौशिक और विशाल कौशिक, उसलापुर ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मात्र 6 वर्षीय वान्या कौशिक की तत्कार और अभिव्यक्ति की अद्भुत प्रस्तुति ने निर्णायकों और दर्शकों का दिल जीत लिया।

वहीं, समूह नृत्य (कथक) श्रेणी में भी श्री डांस एकेडमी के बच्चों ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया। इस समूह में दिव्यांशी, श्रीया, निष्ठा, आरुषि, श्रुति, दिशा और वैष्णवी ने अपनी लयबद्ध और मनमोहक प्रस्तुति से मंच को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम का आरंभ गुरु वंदना से हुआ, जिसके बाद बच्चों ने “तोड़े”, “टुकड़े” और “तत्कार” की प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि तालियों की गड़गड़ाहट देर तक गूंजती रही।

इस अवसर पर गुरु सम्मान के लिए प्रांजलि भट्ट को चुना गया। मंच पर उन्हें गुरु सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने यह सम्मान अपनी 4 वर्षीय सुपुत्री प्रयाशा श्री के साथ ग्रहण किया, जिससे कार्यक्रम का भावनात्मक माहौल और भी सुंदर हो गया।

प्रांजलि भट्ट,ओमप्रकाश भट्ट और मनीषा भट्ट की सुपुत्री हैं। उन्होंने अपने गुरु पद्मश्री रामलाल बरेठ और भूपेंद्र बरेठ से कथक नृत्य की शिक्षा प्राप्त की है तथा कथक नृत्य में स्नातकोत्तर हैं। प्रांजलि ने राजस्थान, उड़ीसा, पुणे, दुर्ग, कटक, रायगढ़ (चक्रधर समारोह) सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे मलेशिया में भी अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

वर्तमान में वे उसलापुर स्थित श्री डांस एकेडमी में बच्चों को कथक की शिक्षा दे रही हैं और रायगढ़ घराने की परंपरा तथा अपने गुरुओं की अमूल्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

छत्तीसगढ़ की धरती पर नृत्य का ये जादू यह साबित करता है कि समर्पण, साधना और संस्कृति का संगम ही सच्ची कला है।

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