बिलासपुर: सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के क्षेत्र में संचालित था अवैध हुक्का बार

बिलासपुर: सरकंडा क्षेत्र में घर के भीतर संचालित हुक्का बार पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर नशे के फैलते नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। पुलिस ने उपकरण जब्त कर कोटपा एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की — यह सराहनीय है। परंतु इस घटना का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

 बड़ा सवाल: जब अंतर्राज्यीय गिरोह पकड़े जाते हैं, तो मोहल्ले में हुक्का बार कैसे?

बिलासपुर पुलिस ने पूर्व में अंतर्राज्यीय नशा गिरोहों को पकड़कर अपनी क्षमता साबित की है। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है—
यदि बड़ी मछलियाँ जाल में आ रही हैं, तो थाना क्षेत्र के भीतर घर से हुक्का बार कैसे संचालित हो रहा था?

-यह मान लेना कठिन है कि ऐसा “एक दिन” में शुरू हो गया होगा।
-हुक्का उपकरण, फ्लेवर, ग्राहकों का आना-जाना, आर्थिक लेन-देन—यह सब एक सुनियोजित गतिविधि की ओर इशारा करता है। -तब क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी में चूक हुई? क्या आसपास के लोगों को भनक नहीं लगी? या फिर शिकायत तंत्र सक्रिय नहीं था?

 निगरानी तंत्र पर पुनर्विचार की जरूरत

पेट्रोलिंग और मुखबिर तंत्र की सक्रियता का दावा अपनी जगह है, लेकिन यह घटना संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सतत निगरानी और सामुदायिक सहभागिता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। नशे का कारोबार केवल सप्लाई चेन से नहीं चलता—यह स्थानीय मांग और सामाजिक स्वीकार्यता से भी पनपता है।

 जवाबदेही और पारदर्शिता

यह विश्लेषण किसी एक थाना या अधिकारी पर प्रश्नचिन्ह लगाने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से है। जब प्रशासन बड़ी उपलब्धियाँ दर्ज करता है, तब छोटी मगर गंभीर घटनाएँ और अधिक ध्यान आकर्षित करती हैं।
जनता यह जानना चाहती है कि—

  • क्या ऐसे स्थलों की पूर्व में कोई शिकायत आई थी?

  • यदि आई थी, तो कार्रवाई में विलंब क्यों हुआ?

  • भविष्य में ऐसी गतिविधियों को प्रारंभिक चरण में ही रोकने के लिए क्या ठोस रणनीति है?

 समाज की भूमिका भी उतनी ही अहम

अक्सर पड़ोस में चल रही गतिविधियों को “निजी मामला” समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। लेकिन जब वही गतिविधि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ जाए, तो मौन भी अपराध के बराबर हो सकता है।

हुक्का बार पर कार्रवाई — लेकिन क्या सब कुछ साफ है?

सरकंडा क्षेत्र में घर के भीतर संचालित अवैध हुक्का बार पर पुलिस की कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। 27 फरवरी 2026 को की गई रेड में जिन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, उनके नाम इस प्रकार हैं —

  1. अथर्व पाण्डेय उर्फ शुभ उर्फ चिकू (पिता – सुधीर कुमार पाण्डेय)

  2. विनित एलानी (पिता – शंकर एलानी)

  3. किन्सु विश्वास (पिता – कृष्णा विश्वास)

  4. यथार्थ कश्यप (पिता – संजय कश्यप)

  5. समीर पटेल (पिता – राम कुमार पटेल)

इनके कब्जे से हुक्का पार्ट, कोल हीटर, फ्लेवर एवं अन्य सामग्री जब्त कर कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

लेकिन पुलिस विज्ञप्ति में क्या “मिसिंग” था?

कार्रवाई की जानकारी दी गई, पर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट नहीं किए गए—

– हुक्का बार कब से संचालित हो रहा था?

विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया कि यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी।
क्या यह पहली बार पकड़ा गया या पहले से इसकी सूचना थी?

क्या आसपास के लोगों की शिकायत थी?

क्या मोहल्ले से कोई लिखित/मौखिक शिकायत आई थी?
यदि हाँ, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?

फ्लेवर और सामग्री की सप्लाई चेन

जब अंतर्राज्यीय गिरोह पकड़े जा रहे हैं, तो यह सामग्री कहां से आ रही थी?
क्या सप्लायर पर भी कार्रवाई होगी?

आर्थिक लेन-देन की जांच

सूचना के अनुसार प्रतिघंटा 500 रुपये लेकर संचालन किया जा रहा था।
क्या पुलिस ने आर्थिक लाभ/डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की?
क्या आय के स्रोत की पड़ताल होगी?

– धारा और कानूनी प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख

-केवल “कोटपा एक्ट” लिख देना पर्याप्त नहीं।
-कौन-सी धारा? क्या अन्य धाराएँ (जैसे जुवेनाइल या सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी) लागू हो सकती थीं?

उपलब्धि के साथ आत्ममंथन भी जरूरी

बिलासपुर पुलिस की कार्रवाई प्रशंसनीय है, पर यह घटना संकेत देती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रह सकती। जब अंतर्राज्यीय गिरोह पकड़े जा सकते हैं, तो स्थानीय स्तर पर अवैध हुक्का बार क्यों फल-फूल रहे हैं—यह प्रश्न उठना लाजमी है।

प्रशासन की सख्ती, पारदर्शिता और समाज की सजग भागीदारी—इन तीनों का संतुलन ही बिलासपुर को नशामुक्त और सुरक्षित बना सकता है।

                                                पुलिस प्रेस विज्ञप्ति

थाना – सरकण्डा, जिला – बिलासपुर (छ.ग.)
अप.क्र. – 259/2026, धारा – 4, 21(1), 21(2), 27 सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधि.
—————————————————-
थाना क्षेत्र में संचालित अवैध हुक्का बार के विरूद्ध सरकण्डा पुलिस का प्रहार।
आर्यन पब्लिक स्कूल के पास चोरी छिपे चला रहे थे हुक्का बार।
हुक्का बार संचालक सहित 4 आरोपी गिरफ्तार।
आरोपियों के कब्ज से हुक्का सामाग्री सहित अलग-अलग ब्रांड के फ्लेवर किया गया जप्त।
आरोपी को गिरफ्तार कर कोटपा अधिनियम के तहत् की गई कार्यवाही।
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नाम आरोपी –
01. अथर्व पाण्डेय उर्फ शुभ उर्फ चिकू पिता सुधीर कुमार पाण्डेय उम्र 18 वर्ष निवासी पलास 16 राजकिशोर नगर सरकण्डा।
02. विनित एलानी पिता शंकर एलानी उम्र 24 वर्ष निवासी रामकृष्ण एन्क्लेव सीपत चौक सरकण्डा।
03. किन्सु विश्वास पिता कृष्णा विश्वास उम्र 18 वर्ष निवासी पैसपिक अपार्टमंेट तोरवा धानमंडी, थाना तोरवा, जिला बिलासपुर (छ.ग.)।
04. यथार्थ कश्यप पिता संजय कश्यप उम्र 18 वर्ष निवासी जोरापारा अलंकार भवन के पास सरकण्डा।
05. समीर पटेल पिता राम कुमार पटेल उम्र 19 वर्ष निवासी राजकिशोर नगर जोरापारा अलंकार भवन के पास सरकण्डा, जिला बिलासपुर छ.ग.
——————————————————
विवरण –
मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि श्रीमान् वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) द्वारा जिले में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने हेतु अधिक से अधिक कार्यवाही करने निर्देशित किया गया है, जिसके परिपालन में श्रीमान् अति.पुलिस अधीक्षक महोदय शहर, बिलासपुर श्री पंकज पटेल एवं सी.एस.पी. (सिविल लाईन/सरकंडा) श्री निमितेश सिंह द्वारा क्षेत्र में सतत् पेट्रोलिंग कर अवैध करोबार करने वालों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने निर्देशित किया गया है, जिसके परिपालन में थाना प्रभारी सरकंडा निरी. प्रदीप आर्य द्वारा थाना स्तर पर टीम तैयार कर भ्रमण करते हुये पतासाजी कर मुखबीरों से सम्पर्क किया जा रहा था कि दिनांक 27.02.2026 को मुखबीर से सूचना मिला कि अथर्व पाण्डेय द्वारा कुछ लोगों को अवैध रूप से सिगरेट तम्बाकू युक्त फ्लेवर मिलाकर प्रतिघंटा 500 रू. के आर्थिक लाभ लेकर हुक्का बार संचालन कर रहा है, उक्त सूचना पर टीम तत्काल मौके पर भेजा गया जिनके द्वारा रेड कार्यवाही कर अथर्व पाण्डेय को अपने घर में हुक्का बार संचालित करते हुये अपने साथी विनित एलानी, किन्सु विश्वास, यथार्थ कश्यप एवं समीर पटेल के साथ हुक्का पीते हुये मिले जिनके कब्जे से हुक्का पार्ट 2 नग, कोल हिटर 1 नग, हुक्का फ्लेवर 1 डिब्बा एवं अन्य हुक्का से संबंधित सामाग्री बरामद हुआ जिसे विधिवत् जप्त कर आरोपियों के विरूद्ध कोटपा एक्ट के तहत् वैधानिक कार्यवाही किया गया है।

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