रीपीट हुई इतिहास की पुनरावृत्ति! डॉ. विनय कुमार पाठक फिर बने थावे विद्यापीठ के कुलपति, 13 नवंबर को NHICF करेगा भव्य अभिनंदन!
शिक्षा जगत के शिखर पुरुष: डॉ. विनय कुमार पाठक को मिला दूसरा कार्यकाल, 13 नवंबर को ‘न्यूज हब इनसाइट’ के राष्ट्रीय मंच पर होगा ऐतिहासिक महा-सम्मान!
बिलासपुर: हरिद्वार की पावन भूमि पर आयोजित थावे विद्यापीठ के भव्य अधिवेशन से एक ऐसी गूंज उठी है, जिसने छत्तीसगढ़ के माथे पर गौरव का एक और नया तिलक लगा दिया है। छत्तीसगढ़ के माटी के लाल, देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, प्रख्यात साहित्यकार, भाषाविद् और जाने-माने समीक्षक डॉ. विनय कुमार पाठक को बिहार के गोपालगंज स्थित प्रतिष्ठित थावे विद्यापीठ के कुलपति पद पर द्वितीय कार्यकाल के लिए पुनः नियुक्त कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक पुनर्नियुक्ति की खबर मिलते ही साहित्यिक, शैक्षणिक, बौद्धिक और सामाजिक गलियारों में उत्सव सा माहौल है। बधाई संदेशों का तांता लग गया है, और हर उस शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है जो शिक्षा और संस्कृति की अलख जगा रहा है।
अब सजेगा मान का मंच: एनएचआईसीएफ (NHICF) करेगा ऐतिहासिक सम्मान
जब प्रतिभा और ईमानदारी का सम्मान होता है, तो पूरा समाज खड़ा होकर सलाम करता है। डॉ. विनय कुमार पाठक की इस गौरवशाली उपलब्धि पर ‘न्यूज हब इनसाइट केयर फाउंडेशन’ (NHICF) ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
संस्था के राष्ट्रीय मंच पर आगामी 13 नवंबर को डॉ. पाठक के सम्मान में एक भव्य और अलौकिक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि उस विराट बौद्धिक साधना को सलाम होगा, जिसने पूरी जिंदगी शिक्षा और साहित्य की सेवा में समर्पित कर दी है।
जन-जन की भागीदारी: शहर के तमाम दिग्गज और सामाजिक संगठन होंगे शामिल
इस महाआयोजन को लेकर बिलासपुर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस भव्य समारोह में सिर्फ शैक्षणिक जगत के लोग ही नहीं, बल्कि—
-विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिक,
-प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन,
-युवा शक्ति और स्वयंसेवी संस्थाएं,
–और कला-साहित्य से जुड़े दिग्गज
एक मंच पर एकत्र होकर डॉ. विनय कुमार पाठक को नमन करेंगे। यह पल गवाह बनेगा इस बात का कि जब कोई व्यक्ति समाज के लिए जीता है, तो पूरा समाज उसके पीछे चट्टान बनकर खड़ा हो जाता है।
एक दमदार प्रेरणा: रुकना मत, झुकना मत, शिखर पर पहुंचना ही जिद है!
डॉ. विनय कुमार पाठक का यह सफर आज के युवाओं, विद्यार्थियों और विचारकों के लिए एक जीता-जागता सबक है—कि अगर इरादे फौलादी हों, काम में दम हो और नियत साफ हो, तो सफलता तुम्हारे कदम चूमने पर मजबूर हो जाती है।
द्वितीय कार्यकाल के लिए उनका पुनः चुना जाना यह साबित करता है कि जब आप अपने काम के प्रति सौ प्रतिशत ईमानदार होते हैं, तो जमाना आपको सिर आँखों पर बिठाता है।
13 नवंबर की यह तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। आइए, इस महाउत्सव का हिस्सा बनिए, इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनिए, क्योंकि ऐसे मौके रोज-रोज नहीं आते—यह जश्न है प्रतिभा का, यह जश्न है अस्मिता का, यह जश्न है जीत का!