बिलासपुर की माटी में गूंजे साहित्य और कला के स्वर, छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर दक्षिण कोसल साहित्य एवं कला परिषद का गरिमामयी आयोजन
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर दक्षिण कोसल साहित्य एवं कला परिषद, बिलासपुर के तत्वावधान में एक अत्यंत भव्य विचार एवं काव्य गोष्ठी सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार के गोपालगंज स्थित थावे विद्यापीठ के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक को द्वितीय बार कुलपति पद पर सुशोभित किए जाने पर अभूतपूर्व हर्षोल्लास के साथ सम्मानित एवं अभिनंदित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण एवं रूपरेखा
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स्वागत एवं उद्देश्य: कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए परिषद के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने अपने स्वागत उद्बोधन में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और परिषद द्वारा साहित्य, कला तथा संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ. विनय कुमार पाठक की पुनर्नियुक्ति को अंचल के लिए गौरव का क्षण बताया।
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भव्य सम्मान: दक्षिण कोसल साहित्य एवं कला परिषद की ओर से मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर अलंकृत किया गया। इस दौरान शहर के तमाम गणमान्य साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने उनका अभिनंदन किया।
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प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे, सनत तिवारी, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, राजेश सोनार, डॉ. गजेंद्र तिवारी, डॉ. अंकुर शुक्ला, सुरेश सिंह बैस सहित राष्ट्रीय कवि संगम की ओर से पूर्णिमा तिवारी और बालमुकुन्द श्रीवास ने सहभागिता दर्ज की।
अतिथियों के प्रेरक विचार
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मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की बधाई देते हुए थावे विद्यापीठ द्वारा हरिद्वार में आयोजित आठवें अधिवेशन की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां ही समाज में सकारात्मक चेतना और वैचारिक परिपक्वता का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
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समारोह की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा ने आयोजन की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे वैचारिक संगम बताया।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में जस्टिस डॉ. चंद्रभूषण बाजपेई, ‘राष्ट्र सृजन अभियान’ दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. प्रद्युम्न कुमार सिन्हा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ. सतीश दुबे एवं एल्डरमैन देवाशीष घोष (लाल्टू) ने अपने ओजस्वी विचारों से डॉ. पाठक की उपलब्धियों को सराहा और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
द्वितीय सत्र: काव्य गोष्ठी में गूंजे भावपूर्ण स्वर
समारोह के द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी ने बेहद कुशलता से किया। इस सत्र में अंचल के प्रतिष्ठित कवियों और रचनाकारों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य गोष्ठी को जीवंत बनाने वाले प्रमुख रचनाकार
महाकवि सनत तिवारी, विजय कल्याणी तिवारी, अमृतलाल पाठक, मनोहर दास मानिकपुरी, शीतल प्रसाद पाटनवार, डॉ. रामेश्वर शाण्डिल्य, प्रतिज्ञा सिंह, जलेश्वरी वस्त्रकार, डॉ. बलराम प्रसाद पाण्डेय, बालमुकुंद श्रीवास, डॉ. सुषमा पण्ड्या, डॉ. आभा गुप्ता, पूर्णिमा तिवारी, ओमप्रकाश बिरथरे, शिवनंदन शुक्ला, दिनेश्वर राव जाधव, बद्री प्रसाद कैवर्त, मोहन सोनी कोटा, रितुराज पाण्डेय बसंत, देवेन्द्र शर्मा पुष्प, एस. कपूर, गया प्रसाद साहू, कविता मोटवानी, राजेश कुमार सोनार, राम रतन श्रीवास, ध्रुव देवांगन, हेमंत गौड़, राकेश खरे, एन.के. शुक्ला, सुखेन्द्र श्रीवास्तव, रीना झा, जगतारण डाहिरे, पिंकी गौड़, नारायण प्रसाद पाली, सत्येन्द्र तिवारी, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी और डॉ. विवेक तिवारी।
कार्यक्रम के अंत में शीतल प्रसाद पाटनवार ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और इस आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।