CG: सदन में गूंजा 100 एकड़ का मामला, लेकिन बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की विज्ञप्ति में ये बड़े सवाल गायब!

बिलासपुर। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाया गया जमीन फर्जीवाड़ा मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। विधायक ने नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश (TCP) और राजस्व विभाग के अफसरों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। करीब 100 एकड़ जमीन पर टुकड़ों में ले-आउट पास कराने और सेवाभूमि को EWS के नाम पर स्वीकृत करने की बात कही।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 50 शिकायतों की पुष्टि की और जांच कमेटी गठन का आश्वासन दिया।

लेकिन विधायक की जारी विज्ञप्ति में कई अहम बिंदुओं का जिक्र नहीं है, जो पूरे मामले को और स्पष्ट कर सकते थे।

 विधायक की विज्ञप्ति में क्या-क्या नहीं है?

1️⃣ संबंधित अफसरों के नाम/पद

विज्ञप्ति में “मिलीभगत” का आरोप है, लेकिन:

  • नगर निगम के कौन अधिकारी?
  • TCP के कौन अधिकारी?
  • राजस्व विभाग से किस स्तर पर स्वीकृति?

– बिना नाम या पदनाम के आरोप सामान्य बयान बनकर रह जाते हैं।

विवादित कॉलोनाइजर / कंपनी का नाम

सबसे अहम बिंदु गायब है:

  • कॉलोनाइजर / कंपनी का नाम क्या?
  • फर्म पंजीकृत है या नहीं?
  • क्या रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराया गया?
  • RERA नंबर क्या है?

-“एक बिल्डर” शब्द से मामला अधूरा लगता है।

 100 एकड़ जमीन का पूरा ब्योरा

विधायक ने लगभग 100 एकड़ निर्माण का आरोप लगाया, लेकिन:

  • कुल कितने खसरा नंबर शामिल?
  • सरकारी जमीन कितनी?
  • सेवाभूमि कितनी?
  • EWS के नाम पर कितनी भूमि स्वीकृत?
  • बाजार मूल्य कितना?

जमीन का सटीक आंकड़ा न होने से आरोपों की गंभीरता का परिमाण स्पष्ट नहीं हो पाता।

 सरकंडा के 3 खसरा नंबर

सदन में तीन खसरा नंबरों का जिक्र हुआ, पर:

  • वे खसरा नंबर कौन से?
  • कुल रकबा कितना?
  • वर्तमान स्थिति क्या?
  • क्या TCP से अनुमति ली गई थी?

जांच कमेटी का स्वरूप

मंत्री ने जांच कमेटी की बात कही, लेकिन:

  • आदेश संख्या?
  • समिति के सदस्य कौन?
  • जांच की समय सीमा क्या?

 विधायक ने क्या सवाल उठाए?

विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में मुख्यतः ये सवाल उठाए:

  • 2023-24 से 4 फरवरी 2026 तक किन-किन कॉलोनाइजरों ने कितनी कालोनियां विकसित कीं?
  • क्या बिना RERA अनुमति निर्माण हुआ?
  • क्या बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें मिलीं?
  • क्या सेवाभूमि को EWS के नाम पर पास किया गया?
  • क्या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ले-आउट स्वीकृत हुए?
  • क्या दोषी बिल्डर की जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगेगी?
  • क्या विधानसभा को गलत जानकारी देने वाले अफसर पर कार्रवाई होगी?

 मंत्री ने क्या जवाब दिया?

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया:

  • कुल 50 शिकायतें प्राप्त हुईं
    • 21 बुनियादी सुविधाओं की कमी
    • 2 RERA अनुमति नहीं लेने से संबंधित
    • 15 रकम वापसी
    • 11 अधिपत्य दिलाने
    • 1 क्षतिपूर्ति
  • 28 मामलों में आदेश पारित
  • 22 प्रक्रियाधीन
  • पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी
  • दस्तावेज उपलब्ध कराने पर विस्तृत जांच कराई जाएगी

हालांकि मंत्री ने किसी विशेष बिल्डर या अफसर का नाम सदन में नहीं लिया।

 अब आगे क्या?

मामला केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की पारदर्शिता का है। यदि सेवाभूमि को EWS बताकर पास कराया गया, तो यह सामाजिक न्याय की अवधारणा से भी जुड़ा मुद्दा है।

जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बनी रहेगी।

अब बड़ा सवाल
-क्या नाम सार्वजनिक होंगे?
-क्या जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगेगी?
क्या दोषी अफसरों पर कार्रवाई होगी?

बिलासपुर की जनता अब आश्वासन नहीं, ठोस परिणाम चाहती है।

 

सुशांत शुक्ला की प्रेस विज्ञप्ति 

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