हारमोनियम संगत में दिखी गुरु की मेहनत, शिष्यों की प्रस्तुति में झलकी साधना
बिलासपुर। संगीत प्रेमियों के लिए आयोजित रास मंजरी संगीत महोत्सव–2026 केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बनकर सामने आया। इस भव्य आयोजन में मंच पर प्रस्तुति देने वाले सभी बाल एवं वरिष्ठ कलाकार संगीतालय संस्था की संचालिका मोना आनंद मैडम के शिष्य रहे, जिनकी वर्षों की तपस्या और संगीत साधना हर सुर में स्पष्ट झलक रही थी।
कार्यक्रम के दौरान मोना आनंद मैडम ने स्वयं हारमोनियम पर संगत करते हुए सभी कलाकारों का साथ दिया। एक-एक प्रस्तुति में उनकी मेहनत, मार्गदर्शन और संगीत के प्रति समर्पण साफ दिखाई दिया। शिष्यों के आत्मविश्वास, सुरों की शुद्धता और भावाभिव्यक्ति में गुरु की साधना की छाप स्पष्ट रूप से महसूस की गई।
बाल कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कलाकारों तक, सभी ने मंच पर ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि कलाकारों की सफलता के पीछे मोना आनंद मैडम का सतत अभ्यास, अनुशासन और प्रेरणादायी शिक्षण सबसे मजबूत आधार रहा।
कार्यक्रम की संचालिका के रूप में भी मोना आनंद मैडम ने अपनी कुशलता का परिचय दिया। उन्होंने पूरे आयोजन को सहज, गरिमामय और संगीतात्मक प्रवाह के साथ संचालित किया, जिससे कार्यक्रम की एक-एक कड़ी दर्शकों से जुड़ती चली गई।
विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना वासंती वैष्णव एवं नृत्याचार्य सुनील वैष्णव एवं संगीत प्रेमियों ने मोना आनंद मैडम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे गुरु ही किसी संस्था की असली पहचान होते हैं, जो न केवल मंच देते हैं, बल्कि स्वयं कलाकारों के साथ खड़े होकर उन्हें संबल प्रदान करते हैं।
रास मंजरी संगीत महोत्सव–2026 इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि जब गुरु का मार्गदर्शन, साधना और समर्पण मंच पर उतरता है, तो शिष्य की प्रस्तुति स्वतः ही उत्कृष्ट बन जाती है। संगीतालय संस्था और मोना आनंद मैडम का यह प्रयास बिलासपुर की सांस्कृतिक विरासत में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।















