रंग, रस और रचनात्मकता से सराबोर हुआ होली मिलन समारोह
बिलासपुर। होली के पावन पर्व पर शहर में रंग, संगीत और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद् द्वारा पुराना सरकंडा स्थित संस्कार भवन में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और लोक परंपरा की रंगीन छटा बिखरती नजर आई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार) ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में उत्साह, उमंग और आपसी प्रेम का संदेश देने वाला त्योहार है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सनत तिवारी, डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. गजेन्द्र तिवारी और हेमंत कुमार गौर उपस्थित रहे।
फाग गीतों की संगीतमय प्रस्तुति ने बांधा समां
समारोह में सुप्रसिद्ध कवि-गायक राम निहोरा राजपूत, सुखेन्द्र श्रीवास्तव, कांति कुमार दुबे, एम.डी. मानिकपुरी, सतानंद दुबे और डॉ. विवेक तिवारी सहित कलाकारों ने पारंपरिक फाग गीतों की ऐसी संगीतमय प्रस्तुति दी कि पूरा वातावरण होली के रंग में सराबोर हो गया।
कविता पाठ में झलका होली का रंग
होली पर केन्द्रित कविता पाठ राजेश कुमार सोनार, हेमंत कुमार गौर, डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे और शीतल प्रसाद पाटनवार ने किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसमें परिषद के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने परिषद द्वारा भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और सभी अतिथियों का स्वागत किया।
अंत में डॉ. शत्रुघन जेसवानी ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सुरेश बैस, अवधेश गुप्ता, महेन्द्र दुबे, अभिषेक दुबे, हर्ष दुबे, आशीष श्रीवास सहित परिषद के अनेक सदस्य और शहर के साहित्य-प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और भाईचारे को मजबूत करने का उत्सव भी है।















