ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल प्रबंधन में सीए सुरेंद्र अग्रवाल, पूर्व सीए एसोसिएशन अध्यक्ष सीए सुशील अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल और IFS एस.एस.डी. बड़गैया डायरेक्टर; प्रवीण अग्रवाल हैं संस्था के चेयरमैन
अभिभावकों का आरोप – गलत जानकारी देकर एडमिशन, अब परीक्षा पर संकट; कानूनी विशेषज्ञ बोले– Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 318 (धोखाधड़ी), 316 (विश्वासघात), 336/338 (जालसाजी) और 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत स्कूल प्रबंधन पर होना चाहिये मामला दर्ज
बिलासपुर। शहर के चर्चित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल में सामने आए मान्यता और परीक्षा विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के एडमिशन के समय जिस बोर्ड और शैक्षणिक व्यवस्था की जानकारी दी थी, अब परीक्षा के समय उससे अलग स्थिति सामने आ रही है। इससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
मामले के सामने आने के बाद अब सिर्फ स्कूल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते सही जानकारी दी जाती तो बच्चों और अभिभावकों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रबंधन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
शहर में चर्चा है कि अगर स्कूल में मान्यता, बोर्ड और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन, डायरेक्टर और प्रिंसिपल पर आती है। क्योंकि किसी भी निजी स्कूल के संचालन, मान्यता और शैक्षणिक व्यवस्था की अंतिम जिम्मेदारी प्रबंधन की ही होती है।
शिक्षा विभाग भी सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि स्कूल में लंबे समय से किसी तरह की अनियमितता थी तो विभागीय स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
विशेषज्ञों की राय – बन सकता है आपराधिक मामला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में अभिभावकों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 318 (धोखाधड़ी), 316 (आपराधिक विश्वासघात), 336/338 (जालसाजी) और 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
अभिभावकों की मांग
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि
– पूरे मामले की **निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच** कराई जाए
-दोषियों के खिलाफ **सख्त कानूनी कार्रवाई** की जाए
-और सबसे महत्वपूर्ण, बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल समाधान निकाला जाए।
सबसे बड़ा सवाल
अब पूरे शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—
क्या बच्चों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?**
प्रशासन और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर अब अभिभावकों और शहरवासियों की नजर टिकी हुई है।















