मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत 38 करोड़ की सौगात के बाद सबसे बड़ा सवाल: विकास दिखेगा या सिर्फ खर्च?

38 करोड़ की स्वीकृति: विकास की बड़ी घोषणा, अब असली परीक्षा जमीन पर

बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम को मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत 38 करोड़ 23 लाख 82 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिलना निश्चित रूप से शहर के लिए महत्वपूर्ण है। खेल परिसर से लेकर सड़क, नाली, नाला, विद्युतीकरण और व्यावसायिक परिसरों तक कई तरह के कार्य इस पैकेज में शामिल हैं। कागज पर देखें तो यह शहर के बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाला बड़ा प्रस्ताव है।

लेकिन सवाल यह नहीं है कि 38 करोड़ स्वीकृत हुए या नहीं। असली सवाल अब यह है कि इन 38 करोड़ से जमीन पर कितना और कैसा काम दिखाई देगा?

स्वीकृति बड़ी है, अब गुणवत्ता उससे भी बड़ी होनी चाहिए

प्रशासकीय स्वीकृति किसी निर्माण कार्य का अंतिम परिणाम नहीं होती। इसके बाद तकनीकी प्रक्रिया, निविदा, कार्यादेश, ड्रॉइंग-डिजाइन, तकनीकी मानक, निर्माण की निगरानी, माप पुस्तिका और भुगतान जैसी कई प्रक्रियाएं आती हैं।

यानी घोषणा के बाद असली जिम्मेदारी शुरू होती है।

नगर निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वीकृत राशि केवल खर्च न हो, बल्कि निर्धारित गुणवत्ता और उपयोगिता के साथ खर्च हो।

एक पैकेज में सड़क भी, नाली भी और व्यावसायिक परिसर भी

स्वीकृत कार्यों पर नजर डालें तो करीब 12.21 करोड़ रुपये का खेल एवं व्यावसायिक परिसर सिरगिट्टी में, करीब 9.38 करोड़ रुपये का सड़क, नाली एवं विद्युतीकरण कार्य जोन-7 में, करीब 4.58 करोड़ रुपये का सड़क-नाली कार्य खमतराई में तथा अन्य क्षेत्रों में नाला, सड़क और व्यावसायिक परिसरों के कार्य शामिल हैं।

यह विविधता बताती है कि निगम ने बुनियादी ढांचे के साथ राजस्व-सृजन वाली परिसंपत्तियों पर भी ध्यान दिया है।

लेकिन व्यावसायिक परिसर बनाना और उससे वास्तविक राजस्व पैदा करना दो अलग-अलग बातें हैं।

कितनी दुकानें बनेंगी? किस मॉडल पर आवंटित होंगी? किराया/लीज से निगम को कितना राजस्व मिलेगा? रखरखाव कौन करेगा? और कितने वर्षों में निर्माण लागत की भरपाई होगी?

इन सवालों का जवाब भी परियोजना की सफलता का हिस्सा होना चाहिए।

सड़क और नाली: निर्माण से ज्यादा जरूरी है डिजाइन

शहर में सड़क और नाली निर्माण का मुद्दा केवल सीमेंट-कंक्रीट डालने तक सीमित नहीं है।

नाली की क्षमता, ढाल, जल निकासी की दिशा, मौजूदा नालों से कनेक्टिविटी और सड़क के लेवल का सही निर्धारण नहीं हुआ तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जलभराव की समस्या बनी रह सकती है।

इसलिए प्रत्येक कार्य में यह स्पष्ट होना चाहिए कि स्वीकृत ड्रॉइंग-डिजाइन क्या है और मौके पर निर्माण उसी के अनुसार हो रहा है या नहीं।

हाल में शहर में निर्माण कार्यों को लेकर उठ रहे तकनीकी सवालों की पृष्ठभूमि में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

38 करोड़ का मतलब 38 करोड़ की जवाबदेही भी

सरकारी राशि जनता के पैसे से आती है। इसलिए हर स्वीकृत कार्य के साथ सार्वजनिक जवाबदेही भी जुड़ी है।

निगम को चरणबद्ध तरीके से यह जानकारी सार्वजनिक करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि—

  • किस कार्य का कार्यादेश किसे मिला?
  • स्वीकृत लागत कितनी है?
  • तकनीकी स्वीकृति किस स्तर पर हुई?
  • ड्रॉइंग एवं डिजाइन क्या है?
  • कार्य पूरा करने की समयसीमा क्या है?
  • निर्माण की गुणवत्ता जांच कौन करेगा?
  • अब तक कितना भुगतान हुआ?
  • कार्य पूर्ण होने के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी?

ऐसी पारदर्शिता से विकास कार्यों पर सवाल कम होंगे और जनता का भरोसा बढ़ेगा।

प्राथमिकता का सवाल भी महत्वपूर्ण

शहर में विकास की जरूरतें अनेक हैं। ऐसे में यह भी देखना होगा कि परियोजनाओं का चयन वास्तविक जन-आवश्यकता, यातायात, जल निकासी, आबादी और भविष्य की शहरी जरूरतों के आकलन के आधार पर हुआ है या नहीं।

विशेषकर सड़क और नाली जैसे कार्यों में केवल वर्तमान समस्या का समाधान पर्याप्त नहीं है। निर्माण ऐसा होना चाहिए कि आने वाले वर्षों में वही सड़क फिर से खोदने या वही नाली दोबारा बनाने की नौबत न आए।

खेल परिसर अच्छी पहल, लेकिन उपयोगिता की योजना भी जरूरी

सिरगिट्टी में खेल एवं व्यावसायिक परिसर के लिए 12 करोड़ से अधिक की राशि प्रस्तावित है। यदि इसे सुव्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाता है तो यह क्षेत्र के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए उपयोगी आधारभूत सुविधा बन सकता है।

लेकिन किसी भी खेल परिसर की सफलता केवल भवन बनने से तय नहीं होती।

खेल सुविधाएं कौन-कौन सी होंगी, उनका संचालन कैसे होगा, खिलाड़ियों को कितनी पहुंच मिलेगी और रखरखाव का खर्च कौन उठाएगा—इन सवालों की योजना निर्माण के साथ ही जरूरी है।

अब निगाह निगम पर

38 करोड़ 23 लाख 82 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति को राजनीतिक उपलब्धि या सरकारी घोषणा के रूप में देखना आसान है। लेकिन जनता के लिए इसकी वास्तविक कीमत तब सामने आएगी जब स्वीकृत परियोजनाएं समय पर, निर्धारित लागत में, निर्धारित गुणवत्ता के साथ और वास्तविक जरूरत के अनुरूप पूरी होंगी।

इसलिए अब निगाह सिर्फ स्वीकृति आदेश पर नहीं, बल्कि टेंडर से लेकर टेंडर की शर्तों, कार्यादेश से लेकर ड्रॉइंग-डिजाइन, निर्माण से लेकर एमबी और भुगतान से लेकर अंतिम उपयोगिता तक होनी चाहिए।

क्योंकि विकास की असली तस्वीर शिलान्यास के दिन नहीं, निर्माण पूरा होने के बाद सामने आती है।

और इस 38 करोड़ की कहानी में भी सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—

“राशि कितनी स्वीकृत हुई” से आगे बढ़कर “जनता को उसके बदले मिला क्या?”

 

विज्ञप्ति 

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत 38.23 करोड़ स्वीकृत

सिरगिट्टी में खेल और व्यावसायिक काम्पलेक्स, भक्त करमा माता चौक से मोपका बाईपास तक सड़क और नाली

खमतराई में सड़क,चांटीडीह में शापिंग काम्पलेक्स और इंदिरा विहार के पास सड़क

बिलासपुर, 8 अक्टूबर 2026/उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्री श्री अरूण साव ने बिलासपुर नगर निगम को विकास कार्यों के लिए एक और बड़ी सौगात दी है। उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत नगरीय प्रशासन विभाग ने मंत्रालय से 38 करोड़ 23 लाख 82 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति आदेश आज जारी की है। इस राशि से सिरगिट्टी में खेल और व्यावसायिक काम्पलेक्स, खमतराई में सड़क और नाली,जोन 2 में नाला,इंदिरा विहार के पास सड़क और व्यावसायिक परिसर,जोन 7 में करमा चौक से मोपका बाईपास तक सड़क,नाली और बिजली तथा चांटीडीह में शापिंग काम्पलेक्स बनाए जाएंगे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 38 करोड़ 23 लाख 82 हजार के स्वीकृत राशि से सिरगिट्टी बन्नाक चौक के पास 12 करोड़ 21 लाख 76 हजार की लागत से खेल काम्पलेक्स और व्यावसायिक काम्पलेक्स बनाया जाएगा। इसी तरह जोन क्रमांक 2 के नर्मदा कोल्डड्रिंक से गोकने नाला तक 3 करोड़ 15 लाख की लागत से नाला निर्माण किया जाएगा। जोन क्रमांक 7 के खमतराई में 4 करोड़ 58 लाख 39 हजार की लागत से सड़क और नाली के कार्य होंगे। जोन क्रमांक 8 में इंदिरा विहार के पास 3 करोड़ 90 लाख रूपये से सड़क और व्यावसायिक परिसर का निर्माण किया जाएगा। जोन क्रमांक 7 में बहतराई चौक के पास भक्त माता करमा चौक से मोपका बाईपास तक 9 करोड़ 38 लाख 44 हजार की लागत से सड़क नाली और विद्युतीकरण के कार्य किए जाएंगे। जोन क्रमांक 7 में ही 4 करोड़ 99 लाख 25 हजार की लागत से शापिंग कांप्लेक्स बनाया जाएगा। इन सभी कार्यों के हो जाने से शहर में खेल गतिविधियों के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा तो वहीं सड़क और ड्रेनेज की समस्या से मुक्ति मिलेगी,इसके अलावा व्यावसायिक काम्पलेक्स के निर्माण से व्यावसायिक गतिविधियों को रफ्तार मिलने के साथ ही निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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