अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर संगोष्ठी में उठा ‘वृद्ध विमर्श’, भारतीय ज्ञान परंपरा में बुजुर्गों की भूमिका पर हुआ मंथन
बिलासपुर। उम्र बढ़ना जिंदगी का स्वाभाविक पड़ाव है, लेकिन बुजुर्गों की समस्याओं को नजरअंदाज करना समाज की चुनौती है। बदलते सामाजिक परिवेश में वृद्धजनों के सम्मान, अधिकार, अनुभव और उनकी भूमिका को लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा में नए सिरे से वृद्ध विमर्श की जरूरत है।
यह बात पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर आयोजित विचार संगोष्ठी में कही।
‘वृद्ध विमर्श’ को आधुनिक समय की जरूरत बताया
पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति द्वारा आयोजित इस सार्थक विचार संगोष्ठी में डॉ. पाठक ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में वृद्ध विमर्श आज आधुनिकता की मांग बन चुका है। वृद्धजनों की समस्याओं पर केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस और सार्थक प्रयास भी जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पास जीवन का लंबा अनुभव और सामाजिक ज्ञान होता है। ऐसे में बदलते दौर में उनके अनुभवों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके सम्मानजनक जीवन के लिए वातावरण तैयार करने पर गंभीर चिंतन होना चाहिए।
कविता, कहानी और लघुकथा के जरिए सामने आया वृद्ध जीवन
संगोष्ठी को साहित्यिक रंग भी मिला। वरिष्ठ कवि सनत तिवारी ने छत्तीसगढ़ी कविता की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। वहीं डॉ. शत्रुघन जेसवानी ने वृद्धजनों को केंद्र में रखकर कहानी पाठ किया।
डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे ने वृद्ध जीवन पर केंद्रित लघुकथा प्रस्तुत की, जबकि डॉ. अंकुर शुक्ला ने काव्य पाठ के माध्यम से वृद्धावस्था से जुड़े भावनात्मक और सामाजिक पक्षों को सामने रखा।
संवाद से समाधान की ओर बढ़ने का संदेश
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक तिवारी ने किया। शीतल प्रसाद पाटनवार ने आभार प्रदर्शन किया। संगोष्ठी में समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर आयोजित इस आयोजन ने एक अहम सवाल को सामने रखा—क्या समाज अपने बुजुर्गों को केवल सम्मान समारोहों तक सीमित रखेगा, या उनके अनुभव, अधिकार और जीवन की वास्तविक समस्याओं को भी सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा?
संगोष्ठी में वक्ताओं और साहित्यकारों ने वृद्धजनों के प्रति सम्मान के साथ-साथ उनके अनुभवों को समाज की नई पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।







