बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी राष्ट्रीय समिति बिलासपुर द्वारा ‘हिंदी दिवस’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मिर्जापुर से पधारे सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. जितेंद्र सिंह ‘संजय’ को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए भव्य रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं वर्तमान कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज-बिहार) रहे। अध्यक्षता डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव एवं विष्णु कुमार तिवारी मंचस्थ रहे।
राष्ट्रभाषा के पद पर हिंदी का अधिकार संवैधानिक विलेखों पर आश्रित नहीं है- डॉ विनय कुमार पाठक
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में हिंदी की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“राष्ट्रभाषा के पद पर हिंदी का अधिकार किसी संवैधानिक कागज़ या विलेख पर आश्रित नहीं है। हिंदी सदा से लोकाश्रयी रही है—जन-जन के हृदय में बसने के कारण यह स्वयं राष्ट्रीय स्तर पर सर्वमान्य है। आज हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली और पसंद की जाने वाली लोकप्रिय भाषा बनकर उभर चुकी है।”
काव्य गोष्ठी में मिर्जापुर के डॉ. संजय के छंदों ने बांधा समां
सम्मान समारोह के उपरांत एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
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मुख्य सम्मानित अतिथि डॉ. जितेंद्र सिंह ‘संजय’ (मिर्जापुर) ने अपनी शानदार छंदबद्ध कविताओं के पाठ से सभागार में मौजूद हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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इसके साथ ही डॉ. विवेक तिवारी, सुरेश सिंह बैस, विष्णु कुमार तिवारी, अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’ एवं डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने अपनी प्रभावी रचनाओं का पाठ किया और हिंदी के संवर्धन पर विचार साझा किए।
समारोह के प्रमुख बिंदु
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स्वागत वक्तव्य: विष्णु कुमार तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की विकास यात्रा एवं साहित्यिक प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
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आभार प्रदर्शन: सुरेश सिंह बैस ने उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया।







