दूसरे जिलों से आए शिक्षकों की जॉइनिंग, सूची मांगने पर DEO का RTI वाला जवाब!
पारदर्शिता की बात करने वाले शिक्षा विभाग में सूची तक सार्वजनिक नहीं? मीडिया के सवाल पर बोले—“RTI से ले लीजिए”
बिलासपुर। जिले में दूसरे जिलों से विकल्प के आधार पर आए शिक्षकों की जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन इन शिक्षकों की सूची को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। मीडिया द्वारा जब जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जॉइनिंग करने वाले शिक्षकों की सूची मांगी गई, तो सूची उपलब्ध कराने के बजाय नए जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडे की ओर से अलग-अलग जवाब सामने आए।
मीडिया के सवाल पर पहले जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्हें पदभार ग्रहण किए अभी दो दिन ही हुए हैं और उन्होंने स्वयं सूची नहीं देखी है। इसके बाद सूची उपलब्ध कराने के सवाल पर जवाब दिया गया कि “RTI से ले लीजिए।”
अब सवाल यह है कि जिस सूची से जुड़ी प्रक्रिया शिक्षा विभाग के कार्यालय में पूरी हुई है, उसकी जानकारी मांगने के लिए आखिर मीडिया को RTI का सहारा क्यों लेना पड़े?
पारदर्शिता सिर्फ भाषणों तक या रिकॉर्ड भी सार्वजनिक होंगे?
शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदस्थापना, विकल्प और जॉइनिंग जैसे मामलों को लेकर हमेशा पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात की जाती है। ऐसे में दूसरे जिलों से विकल्प के आधार पर बिलासपुर आए शिक्षकों की सूची को सार्वजनिक करना व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम हो सकता है।
कम से कम नाम, मूल जिला, विषय/पद, वर्तमान पदस्थापना और जॉइनिंग की स्थिति जैसी बुनियादी जानकारी कार्यालयीन सूचना के रूप में सार्वजनिक किए जाने से अनावश्यक सवालों और चर्चाओं पर भी विराम लग सकता है।
“RTI से ले लीजिए” ने बढ़ाए सवाल
मीडिया द्वारा किसी सरकारी कार्यालय में संपन्न प्रक्रिया से संबंधित सूची मांगे जाने पर सीधे RTI का रास्ता बताना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है। खासकर तब, जब विभाग पारदर्शी प्रशासन और सूचना की उपलब्धता की बात करता हो।
हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी ने हाल ही में पदभार ग्रहण करने की बात कही है। इसलिए यह भी संभव है कि पूरी प्रक्रिया उनके पदभार ग्रहण करने से पहले हुई हो। लेकिन अब उनके कार्यालय के पास उपलब्ध रिकॉर्ड और जॉइनिंग की स्थिति को सार्वजनिक करने में क्या बाधा है, यह सवाल जरूर उठ रहा है।
अब निगाह शिक्षा विभाग पर
दूसरे जिलों से विकल्प के आधार पर आए शिक्षकों की कुल संख्या कितनी है?
किस जिले से कितने शिक्षक आए?
किस आधार पर विकल्प स्वीकार किए गए?
किस स्कूल में किस शिक्षक को पदस्थापना मिली?
कब जॉइनिंग हुई?
और क्या पूरी प्रक्रिया विभागीय नियमों के अनुसार हुई?
इन सवालों का जवाब सूची सार्वजनिक होने के बाद काफी हद तक खुद सामने आ सकता है।
पारदर्शिता का सबसे मजबूत प्रमाण बयान नहीं, बल्कि सार्वजनिक रिकॉर्ड होता है। अब देखना होगा कि बिलासपुर शिक्षा विभाग इस सूची को सार्वजनिक करता है या फिर जानकारी हासिल करने के लिए मीडिया और आम नागरिकों को RTI के दरवाजे तक ही भेजता रहेगा।







