राष्ट्रीय स्तर पर हर साल होगा आयोजन, साहित्यकारों और प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान; परिचर्चा, कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह ने बांधा समां
बिलासपुर। मर्यादा, भक्ति और लोकमंगल के संदेशों से भारतीय जनमानस को समृद्ध करने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर बिलासपुर में साहित्य और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। सागा लेआउट स्थित शुभम् विहार में आयोजित भव्य तुलसी जयंती समारोह में साहित्यकारों, कवियों, समाजसेवियों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता कर आयोजन को गरिमा प्रदान की।
ओंकारेश्वर सेवा समिति, प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी एवं नवनीत मानस समिति पुरान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में परिचर्चा, कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह मुख्य आकर्षण रहे। कार्यक्रम के दौरान स्मारिका में प्रकाशित रचनाओं के यशस्वी रचनाकारों एवं कवियों को सम्मान-पत्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. विनय कुमार पाठक, पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने कहा कि तुलसी जयंती केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने घोषणा की कि समिति द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर तुलसी जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा और साहित्य एवं अन्य क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
साहित्य से समाज तक पहुंचाने का संकल्प
स्वागत भाषण में डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य जनमानस में आध्यात्मिक चेतना एवं साहित्य के प्रति रुचि जागृत करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन निरंतर प्रतिवर्ष आयोजित होकर न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे क्षेत्र और राज्य के लिए प्रेरणादायी मंच के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।
कार्यक्रम में तुलसी साहित्य, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को लेकर विचार-विमर्श हुआ। कवि सम्मेलन ने आयोजन में साहित्यिक रंग भर दिया, वहीं स्मारिका में प्रकाशित रचनाओं के रचनाकारों के सम्मान ने साहित्य साधना को प्रोत्साहन देने का संदेश दिया।
साहित्यकारों और समाजसेवियों का हुआ अभिनंदन
समारोह को गरिमा प्रदान करने वाले साहित्यकारों, समाजसेवियों और विशिष्ट अतिथियों का भी अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अर्चना मिश्रा, संयुक्त कमिश्नर, विजय तिवारी, राजेश कुमार सोनार, मयंक मणि दुबे, बृजेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विवेक तिवारी, शत्रुघ्न जैसवानी, सरस्वती सोनी, डॉ. रश्मिलता मिश्रा, दीपक दुबे सागर, विजय शर्मा, ओमप्रकाश भट्ट, सी.डी. टण्डन, ऊषा श्रीवास्तव, करिश्मा श्रीवास्तव एवं कु. शालिनी गेंदले सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सम्मान समारोह में डॉ. विनय कुमार पाठक एवं न्यायमूर्ति डॉ. चन्द्रभूषण बाजपेयी के कर-कमलों से साहित्यकारों एवं रचनाकारों को सम्मान-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन विष्णु कुमार तिवारी ने किया।
अब तुलसी जयंती बनेगी राष्ट्रीय साहित्यिक पहचान
बिलासपुर में आयोजित इस समारोह ने स्पष्ट संकेत दिया कि तुलसीदास की रचनाएं आज भी साहित्यिक विरासत भर नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत माध्यम हैं। आयोजन को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की घोषणा से साहित्य जगत में इसे एक बड़े मंच के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।







