उपन्यास ‘मुई मरजानी’ से आश्रम के सपने तक: बिलासपुर में साध्वी जानवी ने साझा की समाजसेवा की बड़ी पहल
अनाथ बच्चों के लिए आश्रम बनाने की तैयारी, शासन-प्रशासन से जमीन मिलने का इंतजार
बिलासपुर। किन्नर समाज के जीवन और संवेदनाओं को केंद्र में रखकर लिखे गए उपन्यास ‘मुई मरजानी’ की एक प्रति महामंडलेश्वर जानवी साध्वी को भेंट की गई। उज्जैन की माँ मंदाकिनी गिरी की शिष्या जानवी साध्वी बिलासपुर के पत्रकार कॉलोनी स्थित निवास पर पहुंचीं, जहां लेखक केशव शुक्ला ने उन्हें अपने उपन्यास की प्रति भेंट की।
पुस्तक को देखते हुए महामंडलेश्वर जानवी साध्वी ने कहा कि वे ‘मुई मरजानी’ को अवश्य पढ़ेंगी। इस दौरान साहित्य और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी बातचीत हुई।
बिलासपुर में आश्रम बनाने की योजना
बातचीत के दौरान जानवी साध्वी ने बताया कि वे लंबे समय से बिलासपुर न्यायधानी में आश्रम स्थापित करने के लिए शासन और प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि जमीन उपलब्ध होते ही आश्रम निर्माण की दिशा में कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा और आश्रय की योजना
प्रस्तावित आश्रम को लेकर उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। आश्रम में अनाथ बच्चों को आश्रय देने के साथ उनके शिक्षा-दीक्षा और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के साथ ऐसा वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, जहां वे सुरक्षित माहौल में अपना भविष्य संवार सकें।
साहित्य से समाजसेवा तक जुड़ता एक संवाद
एक ओर ‘मुई मरजानी’ जैसे उपन्यास के माध्यम से किन्नर समाज की संवेदनाओं और जीवन को साहित्य में स्थान देने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर अनाथ बच्चों के लिए आश्रम स्थापित करने की प्रस्तावित पहल समाज के वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को सामने लाती है।
अब नजर इस बात पर है कि बिलासपुर में प्रस्तावित आश्रम के लिए शासन-प्रशासन से भूमि कब उपलब्ध होती है और यह पहल कब जमीन पर आकार लेती है।







