बिलासपुर/शिवरीनारायण। सनातन चिंतन, अध्यात्म और साहित्य का अद्भुत संगम रविवार को मारुति धाम, देवरघटा (शिवरीनारायण) में देखने को मिला। प्रख्यात कवि विजय कल्याणी तिवारी की दसवीं कृति “आज जहां तुम हो खड़े” का भव्य लोकार्पण 110 वर्षीय परम पूज्य संत श्री रामगोपाल दास जी महाराज के करकमलों से सम्पन्न हुआ। समारोह में साहित्य और शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां डॉ. विनय कुमार पाठक एवं चंद्र भूषण वाजपेयी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
करीब 1287 दोहों से सुसज्जित यह ग्रंथ मूलतः अध्यात्म, सनातन दर्शन और जीवन मूल्यों पर आधारित है। पुस्तक में भारतीय संस्कृति, धर्म और आत्मचिंतन के गहन संदेशों को सहज और प्रभावी दोहों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
लोकार्पण समारोह में संत रामगोपाल दास महाराज ने उपस्थित साहित्यकारों, रचनाकारों एवं श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए साहित्य को समाज के नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम बताया। वहीं चंद्र भूषण वाजपेयी ने पुस्तक के चयनित अंशों का उल्लेख करते हुए रचनाओं की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और वैचारिक गहराई की सराहना की।
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि “जिसे धारण किया जा सके, वही धर्म है।” उन्होंने कहा कि कवि ने अपनी इस कृति में धर्म के इसी वास्तविक स्वरूप को केंद्र में रखकर उत्कृष्ट रचनात्मकता का परिचय दिया है। उन्होंने पुस्तक को भाव, भाषा और साहित्यिक गुणवत्ता की दृष्टि से उत्कृष्ट कृति बताया।
लोकार्पण के बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में अमृत लाल पाठक, बुधराम यादव, राकेश पाण्डेय, यशवंत राजपूत, हूप सिंह क्षत्रिय, विजय कल्याणी तिवारी, डॉ. विनय कुमार पाठक एवं राजेश सोनार ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन हूप सिंह क्षत्रिय ने किया, जबकि उजली तिवारी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सुबोध शुक्ल, बसंत यादव, कल्याणी तिवारी, आशीष तिवारी, बल्लू दुबे तथा महाराज सर्वेश्वर दास जी सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक का लोकार्पण नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म, सनातन संस्कृति और साहित्यिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रेरक उत्सव बन गया।







