बिलासपुर। साहित्य प्रेमियों और रचनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण समाचार सामने आया है। राष्ट्रीय साहित्य सृजन संस्थान, बिलासपुर के तत्वावधान में प्रकाशित होने जा रहा बहुचर्चित काव्य संकलन “अंतरंग काव्य सरोवर” अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस विशेष ग्रंथ में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित एवं नवोदित रचनाकारों की चुनिंदा कविताओं को स्थान दिया गया है, जिससे यह संकलन राष्ट्रीय साहित्यिक चेतना का एक सशक्त दस्तावेज बनने जा रहा है।
संस्थान के डायरेक्टर शिवमंगल शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वपूर्ण साहित्यिक परियोजना का प्रकाशन शिक्षाविद एवं थावे विद्यापीठ, गोपालगंज के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन, प्रेरणा और साहित्यिक दृष्टि के परिणामस्वरूप संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ देशभर के रचनाकारों को एक साझा साहित्यिक मंच प्रदान करेगा तथा हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई दिशा देगा।
ग्रंथ के संपादन का दायित्व वरिष्ठ साहित्यकार एवं चर्चित उपन्यासकार केशव शुक्ला निभा रहे हैं। वहीं इसकी संपादक मंडल में देश के सात प्रबुद्ध साहित्यकारों को शामिल किया गया है, जिनमें विजय तिवारी, अमृतलाल पाठक, डॉ. सत्यनारायण तिवारी ‘हिमांशु’, डॉ. अनिता सिंह, डॉ. सर्वेश पाठक, डॉ. शोभा त्रिपाठी ‘शैव्या’ तथा डॉ. संगीता सिंह बनाफर प्रमुख हैं। इन विद्वानों के साहित्यिक अनुभव और मार्गदर्शन से ग्रंथ की गुणवत्ता को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
संस्थान के अनुसार ग्रंथ का प्रकाशन एवं भव्य विमोचन समारोह शीघ्र आयोजित किया जाएगा। प्रकाशन की प्रक्रिया साहित्यग्राम प्रकाशन, बिलासपुर द्वारा प्रारंभ कर दी गई है, जिसकी डायरेक्टर श्रीमती ऋचा-हितेश सिंह बिसेन हैं।
साहित्यिक जगत में इस ग्रंथ को लेकर उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि “अंतरंग काव्य सरोवर” केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि देश के विविध साहित्यिक स्वर, संवेदनाएं और सृजनात्मक ऊर्जा को एक मंच पर समेटने वाला ऐतिहासिक साहित्यिक दस्तावेज सिद्ध होगा।















