बिलासपुर से निकला भक्ति का विराट कारवां, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठी अयोध्या
त्रिवेणी संगम स्नान से आत्मा हुई पवित्र, रामलला दर्शन से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
बिलासपुर/अयोध्या। चैत्र नवरात्र और रामनवमी के पावन अवसर पर बिलासपुर से निकला 1008 रामभक्तों का विशाल जत्था जब अयोध्या पहुंचा, तो पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। रामलला के प्रथम दर्शन करते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं—हर चेहरा आस्था, आनंद और भावनाओं से भीग उठा।
भक्तों ने एक स्वर में कहा—“आज जीवन सफल हो गया।”
भक्ति यात्रा बनी जीवन बदलने वाली अनुभूति
25 मार्च की सुबह बिलासपुर पुलिस ग्राउंड से मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच 1008 श्रद्धालुओं का जत्था रवाना हुआ। यात्रा संयोजक प्रवीण झा के नेतृत्व में पूरी टीम ने सुरक्षा, भोजन, आवास और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं को बेहद व्यवस्थित तरीके से संभाला।
बसों में हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित कर भक्तों ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ यात्रा की शुरुआत की—जो पूरे रास्ते भक्ति के रंग में डूबी रही।
संगम स्नान से आत्मा हुई निर्मल
अयोध्या पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम में स्नान करते ही भक्तों ने एक स्वर में कहा—
“यह केवल स्नान नहीं, आत्मा का शुद्धिकरण है।”
रामलला के दर्शन से छलक पड़े भाव
अयोध्या पहुंचते ही श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा से किया गया। भजन-कीर्तन करते हुए पदयात्रा के रूप में जब जत्था श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंचा, तो जैसे ही रामलला के दर्शन हुए—हर आंख नम हो गई।
- केसी मिश्रा: “ऐसा लगा प्रभु ने स्वयं बुलाया है।”
- अमित साहू: “मैं अब नशामुक्त और अनुशासित जीवन जीने का संकल्प ले रहा हूं।”
स्वयंसेवकों की सेवा बनी यात्रा की ताकत
पूरी यात्रा में दर्जनों स्वयंसेवकों ने भोजन, आवास, चिकित्सा और अनुशासन व्यवस्था को शानदार तरीके से संभाला।
भक्तों ने कहा—
“इनकी सेवा भावना ने यात्रा को आसान और यादगार बना दिया।”
युवाओं में जागा नया संकल्प
इस यात्रा का सबसे बड़ा असर युवाओं पर देखने को मिला—
- संजय वस्त्रकार: “रामलला के दर्शन से नई ऊर्जा मिली।”
- शुभम राज: “अब समाज सेवा के लिए खुद को समर्पित करूंगा।”
आस्था + अनुशासन = अद्भुत संगम
पूरी यात्रा भक्ति, अनुशासन और सामूहिक ऊर्जा का जीवंत उदाहरण बनी।
बसों में भजन, पदयात्रा में जयघोष और संगम स्नान—हर पल ने श्रद्धालुओं को भीतर तक झकझोर दिया।
यात्रा संयोजक प्रवीण झा बोले:
“हमारा उद्देश्य केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभव देना था।”
यह यात्रा सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली आध्यात्मिक यात्रा बन गई—जहां आस्था ने संकल्प को जन्म दिया और भक्ति ने जीवन को नई दिशा।















