सेवानिवृत्ति के बाद भी ज्ञानदान में जुटे हेमलता श्रीवास और आनंद जावलकर
बिलासपुर। जहां एक ओर शिक्षक अभाव से शासकीय स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं, नगर निगम बिलासपुर के लालबहादुर शास्त्री स्कूल में नि:स्वार्थ सेवा और समर्पण की एक प्रेरक मिसाल सामने आई है।
विद्यालय में कला संकाय के व्याख्याता की कमी से परेशान विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए सेवानिवृत्त व्याख्याता सुश्री हेमलता श्रीवास ने बिना किसी मानदेय, बिना किसी स्वार्थ के पुनः कक्षा की जिम्मेदारी संभाल ली।
सुश्री हेमलता श्रीवास की नियुक्ति वर्ष 1986 में उच्च श्रेणी शिक्षक के रूप में नगर निगम स्कूल में हुई थी। वर्ष 1997 में व्याख्याता पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने वर्षों तक शिक्षा सेवा दी और 2022 में सेवानिवृत्त हुईं।
सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्हें ज्ञात हुआ कि विद्यालय में कला विषय का कोई व्याख्याता नहीं है और विद्यार्थी परेशान हैं, तब संस्था के प्राचार्य बी.के. चौकसे के आग्रह पर उन्होंने पुनः विद्यालय में आकर निःशुल्क अध्यापन कार्य शुरू किया, जो आज भी निरंतर जारी है।
इसी कड़ी में शिक्षा सेवा की दूसरी मिसाल बने हैं श्री आनंद जावलकर, जो एलआईसी के सेवानिवृत्त असिस्टेंट मैनेजर हैं। उन्होंने स्वयं समाचार पत्रों में विद्यालय में शिक्षकों की कमी संबंधी समाचार पढ़ा। प्राचार्य से पूर्व परिचय होने के कारण उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर पढ़ाने की इच्छा जाहिर की और पिछले दो वर्षों से निरंतर निःशुल्क अध्यापन कर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।
इन दोनों शिक्षकों का योगदान यह साबित करता है कि
सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं, बल्कि समाज को लौटाने का अवसर है।
लालबहादुर शास्त्री स्कूल में इन वरिष्ठ शिक्षकों की निस्वार्थ सेवा से न केवल विद्यार्थियों को संबल मिला है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी एक नई दिशा और प्रेरणा प्राप्त हुई है।















