बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के लिंगियाडीह में चल रहा “लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन” अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। पहली बार क्षेत्र की गरीब, मेहनतकश महिलाएं अपने हक और अस्तित्व की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आई हैं। आंदोलनकारियों के तेवर साफ संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि प्रदेश स्तरीय जन आंदोलन का रूप लेने जा रहा है।
लिंगियाडीह बचाओ के संरक्षक, कुर्मी समाज के जिला अध्यक्ष, किसान मजदूर महासंघ एवं एससी–एसटी–ओबीसी महासंघ के नेता तथा प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता श्याममुरत कौशिक ने साफ शब्दों में कहा कि
“बेलतरा में यह पहला अवसर है जब गरीब महिलाएं सड़क पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। अब यह लड़ाई यहीं नहीं रुकेगी, इसे पूरे प्रदेश में लड़ा जाएगा।”
वहीं, लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष डॉ. रघु साहू ने सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला करते हुए कहा—
“कुछ लोग सत्ता में चूर होकर यह भूल गए हैं कि इन्हें जीत गरीब जनता ने दिलाई है। आज वही जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। लिंगियाडीह के आंदोलन से पूरे प्रदेश के गरीबों में हाहाकार है, लेकिन अब लोग जाग चुके हैं।”
महिलाओं का ऐलान: अनिश्चितकालीन महाधरना जारी रहेगा
स्थानीय महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका अनिश्चितकालीन हड़ताल और महाधरना तब तक जारी रहेगा, जब तक लिंगियाडीह को तोड़ने की साजिश पूरी तरह बंद नहीं की जाती। महिलाओं का कहना है—
“हमने वोट दिया, लेकिन हमारा भरोसा तोड़ दिया गया। सड़क के नाम पर हमारे घर, हमारी बस्ती तोड़ने की कोशिश की जा रही है। जब तक सांस है, तब तक आस है।”
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार किस्तों में तोड़फोड़ की साजिश रच रही है और सिर्फ लिंगियाडीह ही नहीं, बल्कि चिंगराजपारा, चांटीडीह, बहतराई, खमतराई, मोपका, डबरीपारा जैसे इलाकों को भी टारगेट किया जा रहा है। सवाल उठाया गया— “आखिर लिंगियाडीह ही क्यों? किसके इशारे पर यह सब हो रहा है, यह जनता भली-भांति समझ रही है।”
सभी वर्गों से एकजुट होने की अपील
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो सभी समाज, सभी वर्गों को एकजुट कर इस लड़ाई को भव्य जन आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
महाधरना स्थल पर उमड़ा जनसैलाब
पिछले कई दिनों से दुर्गा नगर की महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे इस महाधरने में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध जन, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला।
महाधरना में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे— कांग्रेस नेता संजय यादव, साहू समाज के नेता भोलाराम साहू, प्रशांत मिश्रा, दिनेश घोरे, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, पिंकी देवांगन, यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, उमा मिश्रा, सबिता डे, वंदना डे, हेमलता देवांगन, लता देवांगन, पुष्पा देवांगन, राजकुमारी देवांगन, साधना यादव, कल्पना यादव, नंदकुमारी, जमुना शर्मा, संगीता यादव, रूपा सरकार, सीता साहू, ललिता मानिकपुरी, अर्पणा पटेल, शीला सिंह, लीला, उर्मिला, अनीता पाटिल, कुंती प्रजापति, सोनिया निषाद, कुमारी निषाद, रेशमी अहिरवार, उमा अहिरवार, सोनू गोस्वामी, श्रवण मानिकपुरी, डॉ. अशोक शर्मा, टिंकू, सतीश, महेश्वर, बलराम, अग्नू, सूरज यादव, लखन कश्यप, अनिकेत कश्यप, राजा पाटिल सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
साफ संदेश
लिंगियाडीह की महिलाओं और जनता ने साफ कर दिया है— यह लड़ाई घर, जमीन और सम्मान की है… और अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
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