बिलासपुर: कमर में पिस्टल, दिल में गुरूर और हाथ में स्टियरिंग – 19 साल का अर्चित केडिया समाज को क्या संदेश दे रहा?

19 की उम्र… शराब, XUV और पिस्टल! ये कैसा नया ट्रेंड है?

 सड़क पर नशे की रफ्तार और कानून की ठिठकती पकड़

20 जुलाई की रात बिलासपुर में महाराणा प्रताप चौक पर हुई एक घटना ने फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई हमारे समाज में कानून का भय बचा है? अर्चित केडिया, एक 19 वर्षीय युवक, शराब के नशे में चूर होकर महंगी गाड़ी चलाते पकड़ा गया और उसके पास से एक एयरगन जैसी वस्तु भी बरामद हुई। पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत ₹10,000 का जुर्माना लगाया और बीएनएनएस की धारा 106 के अंतर्गत एयरगन जप्त की।

लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता

जब एसपी रजनेश सिंह जैसे अधिकारी लगातार सख्ती के निर्देश दे रहे हैं, तो आखिर इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? कहीं यह प्रशासन की सख्ती का असर केवल सड़कों तक तो सीमित नहीं हो गया? शराब पीकर वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी है।

अचरज की बात यह है कि सिर्फ 19 साल की उम्र में युवक के पास महंगी कार और पिस्टलनुमा हथियार है। क्या यह सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य और पालन-पोषण की विफलता का संकेत नहीं देता? यह दर्शाता है कि कुछ युवाओं में अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक जवाबदेही की भावना का तेजी से ह्रास हो रहा है।

जरूरत सिर्फ दंड की नहीं है, बल्कि समाज को यह भी सोचना होगा कि ऐसे युवाओं को कौन प्रेरित कर रहा है? क्या सामाजिक प्रतिष्ठा केवल गाड़ी और स्टेटस तक सीमित रह गई है? क्या घर-परिवार, शिक्षण संस्थान और समुदाय इस विघटन के लिए आंखें मूंदे हुए हैं?

पुलिस की सक्रियता की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन अकेले कानून व्यवस्था इस सामाजिक संकट को नहीं सुलझा सकती। इसके लिए सामूहिक सामाजिक चेतना और कठोर सांस्कृतिक अनुशासन की आवश्यकता है। वरना, ऐसे अर्चितों की फौज हमारे शहरों की सड़कों पर बेलगाम दौड़ती रहेगी।

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