रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं। पिछले 3-4 सालों से अपनी ही हक की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) के लिए संघर्ष कर रहे CHOs ने अब शासन-प्रशासन के खिलाफ हुंकार भर दी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर आगामी 5 नवंबर 2026 को रायपुर के नवा रायपुर स्थित ‘स्वास्थ्य भवन’ (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय) का विशाल घेराव किया जाएगा।
इस आंदोलन को लेकर प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर हुए CHOs:
क्या हैं मुख्य मुद्दे और विवाद?
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इंसेंटिव के नाम पर सिर्फ CHOs को निशाना बनाने का आरोप:
संघ का आरोप है कि इंसेंटिव घोटाले की जांच के नाम पर केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को ही लक्षित किया जा रहा है और द्वेषपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। जबकि प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रदर्शन और कई स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित होती है, इसलिए जांच सभी संबंधित कर्मचारियों की होनी चाहिए।
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राज्य कार्यालय के आदेशों की हो रही अनदेखी:
हर साल और हर महीने की 10 तारीख तक PLP पोर्टल के जरिए सत्यापन कर भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश हैं। इसके बावजूद जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेहीहीनता साफ झलकती है।
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अतिरिक्त बोझ और नौकरी से निकालने की धमकियां
ऑनलाइन प्रविष्टियों और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का पूरा अतिरिक्त बोझ अकेले CHOs पर लाद दिया गया है। वहीं कई जिलों में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां तक दी जा रही हैं, जिससे असुरक्षा का माहौल है।
CHOs की प्रमुख 5 सूत्रीय मांगें
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1. द्वेषपूर्ण आदेशों पर रोक: इंसेंटिव घोटाले के नाम पर CHOs के खिलाफ जारी अनुचित आदेश तुरंत निरस्त हों और पिछले 7-8 महीने की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो।
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2. मूल वेतन में समायोजन: भुगतान में बार-बार होने वाली अनियमितताओं को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए प्रोत्साहन राशि को सीधे मूल वेतन में जोड़ा जाए।
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3. स्पष्ट कार्य-विभाजन (TOR): उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर सभी पदों के अस्पष्ट कार्य-दायित्वों का पुनरीक्षण कर न्यायसंगत कार्य-विभाजन तय हो।
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4. सुकमा मामला: सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के बाद भी मनमाने तरीके से कम भुगतान करने के मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई कर अंतर राशि दी जाए।
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5. लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन: शासन के आदेशों का पालन न करने और भुगतान में अनावश्यक देरी करने वाले जिला व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार की दो टूक
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए जनता तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाले CHOs के आर्थिक हितों और सम्मान के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है। यदि जिला स्तर पर अधिकारी राज्य के आदेशों का पालन नहीं करवा पा रहे हैं, तो यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी है।
संघ ने साफ कर दिया है कि 5 नवंबर के घेराव से पहले यदि शासन और एनएचएम (NHM) के उच्चाधिकारी ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो यह आंदोलन और भी ज्यादा उग्र और व्यापक रूप ले लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।