गोरखपुर में गूँजी भारतीय ज्ञान परंपरा की स्वर लहरियाँ — डॉ. विनय कुमार पाठक ने बोधकथा शोध संस्थान के कार्यों को सराहा

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान डॉ. विनय कुमार पाठक ने ‘बोधकथा शोध संस्थान’ का अवलोकन कर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में संस्थान की भूमिका को अत्यंत सराहनीय बताया। वे विशेष आमंत्रण पर बोधकथा शोध संस्थान गोरखपुर के प्रमुख डॉ. शिव नारायण सिंह के आग्रह पर प्रातः संस्थान पहुँचे।

डॉ. पाठक के साथ डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव और डॉ. गजेंद्र तिवारी भी मौजूद रहे। संस्थान के विभिन्न विभागों और शोध गतिविधियों का अवलोकन करने के बाद डॉ. पाठक ने कहा कि आज के समय में ऐसे शोध संस्थान ही सारस्वत क्षेत्रों में नित नए अनुसंधानों का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह संस्थान विगत वर्षों से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। विशेष रूप से पंचतंत्र, हितोपदेश और जातक कथाओं के माध्यम से भारतीय ज्ञान मंजूषा को सामान्य जन तक सरल भाषा में पहुँचाने का जो प्रयास हो रहा है, वह अनुकरणीय है।

डॉ. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव और डॉ. गजेंद्र तिवारी ने भी संस्थान के कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के संस्थान भारतीय बौद्धिक परंपरा को नई ऊर्जा देते हैं और शोध के क्षेत्र में नूतन प्रतिमान स्थापित करते हैं।

इस अवसर पर संस्थान परिवार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

स्पष्ट है कि गोरखपुर की यह धरती अब भारतीय ज्ञान-विमर्श का नया केंद्र बनती जा रही है, जहाँ परंपरा और आधुनिक शोध का संगम दिखाई दे रहा है।

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