मुंगेली। सोनकर कॉलेज, मुंगेली में विकलांग विमर्श जैसे समकालीन और संवेदनशील विषय पर आयोजित दो दिवसीय 19वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी बौद्धिक चिंतन, शोध और सामाजिक सरोकार का सशक्त मंच बनकर उभरी। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर विमर्श को नई दिशा दी।
संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. व्ही. के. सारस्वत, कुलपति पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार पाठक, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद एवं कुलपति थावे विद्यापीठ, गोपालगंज ने की।
विशेष अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेई, पूर्व न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, मदन मोहन अग्रवाल (राष्ट्रीय महामंत्री), संतुलाल सोनकर (संस्थापक) एवं शिव आशीष सोनकर (डायरेक्टर) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में पंजीयन, उद्घाटन सत्र, तकनीकी सत्र एवं शोध-सार वाचन क्रमशः संपन्न हुए।
प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुरेश माहेश्वरी (अमलनेर, महाराष्ट्र) ने की, जिसमें डॉ. रामशंकर भारती (झांसी), डॉ. अनीता सिंह एवं डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने विकलांग विमर्श के विविध आयामों पर अपने विचार रखे।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. रामगोपाल सिंह (अहमदाबाद), डॉ. मीना सोनी (झारसुगुड़ा) एवं डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी) ने शोध प्रस्तुत कर समावेशी समाज की अवधारणा को रेखांकित किया।
तृतीय सत्र में डॉ. मीनकेतन प्रधान (रायगढ़), डॉ. श्रीधर गौरहा (बिलासपुर), लिप्सा पटेल (सुंदरगढ़) एवं डॉ. स्मृति जैन ने अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि प्रो. सी. के. सरस्वती ने सोनकर कॉलेज की शैक्षणिक प्रगति एवं शोधपरक गतिविधियों की सराहना की। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि विकलांग विमर्श केवल अकादमिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का आधार है।
सांस्कृतिक संध्या में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत कर दिया। केंद्रीय विद्यालय की छात्रा कुमारी अमिय दुबे ने अपने संवेदनशील आलेख से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
दो दिवसीय संगोष्ठी में 50 से अधिक शोध आलेख प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर डॉ. अनीता सिंह एवं अनुपम दास द्वारा संपादित पुस्तक “विकलांग विमर्श की कहानी (भाग–2)” का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम में राजेंद्र अग्रवाल, डॉ. श्यामलाल निराला, डॉ. सविता मिश्रा, डॉ. एम. एम. वैष्णव, डॉ. के. के. दुबे, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. अशोक पांडे, डॉ. जयश्री शुक्ला, डॉ. इसाबेला लकड़ा, डॉ. ए. के. यदु, शिवशंकर सिंह, विष्णु कुमार तिवारी, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. विवेक तिवारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शोधार्थी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गजेंद्र तिवारी ने किया तथा आभार प्रदर्शन संस्थापक संतुलाल सोनकर ने किया।














