छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जब 1.72 लाख करोड़ का बजट पेश किया, तो साफ था कि यह सिर्फ आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह बजट “SANKALP” थीम के साथ आया है — यानी वादों को जमीन तक पहुंचाने का दावा।
अब सीधे मुद्दे पर आते हैं — यह बजट छत्तीसगढ़ वासियों के लिए कितना फायदेमंद और कितना जोखिम भरा है?
किसान: सरकार का सबसे बड़ा दांव
- कृषक उन्नति योजना – ₹10,000 करोड़
- मुफ्त बिजली – ₹5,500 करोड़
- फसल बीमा – ₹820 करोड़
संदेश साफ है: ग्रामीण वोट बैंक और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना प्राथमिकता है।
धांसू पॉइंट: खेती को इनपुट सपोर्ट मिल रहा है।
कमजोर कड़ी: MSP, मार्केट लिंक और वैल्यू एडिशन पर बड़ा संरचनात्मक सुधार नजर नहीं आता।
महिला: भावनात्मक और आर्थिक दोनों कार्ड
- महतारी वंदन – ₹8,200 करोड़
- संपत्ति रजिस्ट्रेशन में 50% छूट
- बालिका को 18 वर्ष पर ₹1.5 लाख
यह सीधा सामाजिक सुरक्षा और राजनीतिक मजबूती का मिश्रण है।
फायदा: महिला वर्ग में आर्थिक भरोसा।
सवाल: क्या यह योजनाएं आत्मनिर्भरता बढ़ाएँगी या केवल सहायता तक सीमित रहेंगी?
युवा और टेक्नोलॉजी: भविष्य की तैयारी?
- AI मिशन
- स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन
- CG ACE (प्रतियोगी परीक्षा सहायता)
- नए मेडिकल कॉलेज, ITI
-पहली बार बजट में “AI” और “स्टार्टअप” शब्दों को गंभीरता से जगह मिली है।
धांसू संकेत: राज्य टेक इकोनॉमी की ओर बढ़ना चाहता है।
चुनौती: प्राइवेट सेक्टर जॉब ग्रोथ का ठोस डेटा या निवेश प्रतिबद्धता स्पष्ट नहीं।
इंफ्रास्ट्रक्चर: अच्छा लेकिन और तेज़ चाहिए
पूंजीगत व्यय ₹26,500 करोड़ है।
लेकिन बजट अनुपात 15.4% — पिछले साल से थोड़ा कम।
– यानी सड़क, पुल, बैराज, एयरपोर्ट पर खर्च है, पर “विकास की स्पीड” और बढ़ सकती थी।
वित्तीय स्थिति: संतुलित लेकिन दबाव में
- राजकोषीय घाटा – 2.87% (FRBM सीमा के भीतर)
- राजस्व घाटा – ₹2,000 करोड़
-अभी स्थिति नियंत्रण में है।
– लेकिन लगातार सब्सिडी आधारित मॉडल भविष्य में दबाव बना सकता है।
बस्तर-सरगुजा फोकस: विकास + रणनीति
- शिक्षा सिटी (अबूझमाड़)
- बैराज निर्माण
- अतिरिक्त पोषण सहायता
– यह सिर्फ बजट नहीं, सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा रणनीति भी है.
बड़ा सवाल
यह बजट “लोककल्याण + विकास” का मिश्रण है।
यह न पूरी तरह चुनावी है, न पूरी तरह सुधारवादी।
– अगर क्रियान्वयन तेज और पारदर्शी रहा तो यह बजट छत्तीसगढ़ को 2047 विज़न की राह पर मजबूत कर सकता है।
– लेकिन यदि योजनाएं घोषणाओं तक सीमित रहीं तो यह बजट “सब्सिडी विस्तार” बनकर रह जाएगा।
सच यही है — संकल्प का असली इम्तिहान जमीन पर होगा, सदन में नहीं।















