छत्तीसगढ़ की राजनीति में आजमाए हुए चेहरों से लेकर नए नेताओं तक—कांग्रेस ने एक साथ 41 जिलों में नया नेतृत्व तैनात करके यह साफ कर दिया है कि संगठन अब आधे-अधूरे प्रयोगों पर नहीं, बल्कि बूथ से लेकर जिला स्तर तक ठोस पकड़ बनाने की कोशिश में है।
यह बदलाव सिर्फ एक सूची नहीं है—यह पार्टी की दबी हुई बेचैनी, ठहराव की थकान और नई उम्मीदों की खिड़की खोलने की कोशिश भी है।
क्या नए कप्तान कांग्रेस की दिशा बदल पाएंगे?
कांग्रेस ने लंबे समय से जिस समस्या से जूझा है, वह है—जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी। चुनाव पास आते ही दिए जाने वाले तात्कालिक वादे, बैठकें और अभियान अक्सर मौसमी साबित होते रहे हैं।
लेकिन इस बार पार्टी ने जिला नेतृत्व को बदलकर यह संदेश दिया है कि अब वह
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ज़मीनी नेतृत्व पर भरोसा करने,
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पुराने समीकरण बदलने,
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और कार्यकर्ताओं को वास्तविक जिम्मेदारी देने
के लिए तैयार है।
यह ठीक उसी तरह है जैसे कोई टीम लगातार मैच हारने के बाद कैप्टन बदलकर नई रणनीति अपनाती है—पर असली परीक्षा मैदान में उतरकर ही होती है।
युवा और अनुभव का मिश्रण—लेकिन क्या यह पर्याप्त है?
सूची में
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नए चेहरे,
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युवाओं की अच्छी संख्या,
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और कुछ जिलों में मजबूत स्थानीय नेताओं
को जिम्मेदारी मिली है।
यह मिश्रण आकर्षक तो है, पर सवाल यह है कि—
क्या ये नेता सिर्फ पद संभालेंगे या संगठन को जगाने का कठिन काम भी करेंगे?
क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजनीति में
फोटो, प्रेस नोट और मीटिंग से ज्यादा
मतदाताओं के दरवाजे खटखटाने की मेहनत चलती है।
चुनौती बड़ी है—क्योंकि जनता की अपेक्षाएँ भी बदल चुकी हैं
छत्तीसगढ़ के जिलों में
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बेरोज़गारी,
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महंगाई,
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कृषि संकट,
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स्थानीय भ्रष्टाचार,
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और प्रशासनिक अक्षमता
जैसे मुद्दे हर रोज़ सामने आ रहे हैं।
अगर कांग्रेस इन मुद्दों पर सक्रिय नहीं हुई, तो नया नेतृत्व भी पुराने ढर्रे का शिकार हो जाएगा।
पार्टी को समझना होगा कि अब जनता नेताओं के भाषण नहीं, क्रियाशीलता देखना चाहती है।
कांग्रेस ने चाल चली है—अब अगली चाल जनता के हाथ में होगी
यह नियुक्तियाँ कांग्रेस संगठन के लिए रीसेट बटन की तरह हैं।
लेकिन अगर ये अधिकारी
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कार्यकर्ताओं को जोड़ने में असफल हुए,
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जिले की समस्याओं पर बोलने में हिचकिचाए,
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या सिर्फ सोशल मीडिया के नेता बनकर रह गए,
तो यह “बड़ा फेरबदल” भी कुछ महीनों में कागज पर छपी एक सूची भर रह जाएगा।
यह बदलाव समय की मांग था—अब देखना है क्या नई टीम जमीन पर बदलाव ला पाती है
कांग्रेस ने 41 कप्तान बदलकर यह तो साबित कर दिया है कि वह रणनीति बदलने को तैयार है।
पर असली सवाल वही पुराना है—
क्या नया नेतृत्व कांग्रेस को जनता से फिर जोड़ पाएगा?
क्या जिले की टीम बूथ तक ऊर्जा पहुंचा पाएगी?
और सबसे जरूरी—क्या कांग्रेस इस बार समय रहते जाग चुकी है?
आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यह निर्णय ऐतिहासिक साबित होगा या महज एक और औपचारिक बदलाव।
कौन-कौन बने नए जिला अध्यक्ष?
जारी सूची में शामिल प्रमुख नियुक्तियाँ—
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बिलासपुर सिटी – सिद्धांशु मिश्रा
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बिलासपुर ग्रामीण – महेन्द्र गंगोत्री
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रायपुर सिटी – श्रीकुमार शंकर मेनन
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रायपुर ग्रामीण – राजेन्द्र पप्पू बंजारे
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दुर्ग सिटी – धीरज बाकलीवाल
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जांजगीर-चांपा – राजेश अग्रवाल
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रायगढ़ सिटी – शख़ा यादव
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रायगढ़ ग्रामीण – नागेन्द्र नेगी
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सुरजपुर – सुश्री शशि सिंह कोर्राम
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सुकमा –हरीश लखमा
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सरगुजा – बालकृष्ण पाठक

















