बिलासपुर: विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित विचार एवं काव्य गोष्ठी संस्कार भवन, सरकंडा के भव्य सभागार में उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में हिंदी की वैश्विक प्रतिष्ठा, भविष्य और रचनात्मक भूमिका पर गहन विमर्श हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (संरक्षक एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज – बिहार) ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि भले ही हिंदी को राजनीतिक रूप से राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिला हो, लेकिन 150 से अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन, शोध और प्रवासी साहित्य विमर्श इस बात का सशक्त प्रमाण है कि हिंदी आज वैश्विक क्षितिज पर प्रतिष्ठित भाषा बन चुकी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे (राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने कहा कि विश्व में सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में हिंदी का दूसरा स्थान होना हम सभी के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में रमेश श्रीवास्तव (समीक्षक), विष्णु कुमार तिवारी (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष), डॉ. विवेक तिवारी एवं सहोरिक यादव (नायब तहसीलदार, सकरी) ने भी हिंदी भाषा और साहित्य के विविध आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर उपस्थित कवित्रियों द्वारा हिंदी पर केंद्रित काव्य पाठ ने गोष्ठी को साहित्यिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. बजरंगबली शर्मा द्वारा किया गया। आयोजन में प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी सदस्य उपस्थित रहे।
विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर यह आयोजन हिंदी के वैश्विक सम्मान और सृजनात्मक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।















