बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस रेंज में ‘अनुभव’ QR कोड सिस्टम के शुभारंभ के साथ पुलिस-जनसंवाद का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग की इस नवाचारी पहल ने आम नागरिकों को थाने की व्यवस्था पर सीधे अपनी राय और शिकायत वरिष्ठ स्तर तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम दिया है। लेकिन अब सवाल यही है कि QR कोड के लॉन्च के बाद उस पर आने वाले फीडबैक पर कार्रवाई कितनी गंभीर और समयबद्ध होगी?
फीडबैक मिलेगा, अब जवाबदेही की बारी
QR कोड स्कैन कर आमजन सीधे पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय तक अपनी बात पहुँचा सकेंगे। पहचान गोपनीय रखने की सुविधा भी इस व्यवस्था को भरोसेमंद बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम तभी प्रभावी होगा जब
– हर फीडबैक की मॉनिटरिंग
– थाने-स्तर पर जवाबदेही
– और सुधार की स्पष्ट समयसीमा
तय की जाएगी।
थानों में सुधार या सिर्फ रिपोर्टिंग सिस्टम?
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि फीडबैक के आधार पर थानों की व्यवस्था में सुधार किए जाएंगे। अब आमजन की निगाह इस बात पर है कि
– क्या शिकायतों पर वास्तविक बदलाव दिखेगा?
– क्या सकारात्मक फीडबैक को भी रिकॉर्ड कर सराहना मिलेगी?
– और क्या लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी?
यहीं से इस नवाचार की असली परीक्षा शुरू होती है।
पारदर्शिता तभी सार्थक, जब परिणाम दिखें
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फीडबैक पर केवल औपचारिक संज्ञान लिया गया, तो जनता का भरोसा टूट सकता है।
लेकिन यदि
– सुधार दिखाई दे
– व्यवहार में बदलाव आए
– और शिकायतों का समाधान समय पर हो
तो ‘अनुभव’ QR कोड पुलिसिंग का मॉडल सिस्टम बन सकता है।
जनता की भूमिका भी अहम
आईजीपी श्री रामगोपाल गर्ग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे
– सही
– वास्तविक
– और जिम्मेदार फीडबैक दें।
अच्छे अनुभव साझा करना भी उतना ही ज़रूरी है, जितना कमियों की ओर ध्यान दिलाना।
‘अनुभव’ QR कोड की शुरुआत ने उम्मीदें जगाई हैं,
लेकिन विश्वास तभी बनेगा जब फीडबैक का असर ज़मीन पर दिखेगा।
अब असली सवाल यही है—
-क्या QR कोड सिर्फ स्कैन तक सीमित रहेगा,
या फीडबैक से पुलिस व्यवस्था में सचमुच बदलाव आएगा?
यह फैसला अब कार्रवाई करेगी।















