बिलासपुर: न्यूज़ हब इनसाइट हमेशा से जनता की आवाज़ को तरजीह देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से उनके कामकाज पर सवाल पूछता आया है। हमारा मकसद साफ है— जनता के टैक्स से तनख्वाह पाने वाले अधिकारी जनता को जवाबदेह हों और सूचना में पारदर्शिता बनी रहे।
जनता की मांग पर हमारी टीम रेलवे GM ऑफिस में मौजूद CPRO सुस्कर विपुल विलासराव से रैक साइडिंग की प्रक्रिया जानने के अलावा वो जानकारी भी जाननी चाही जिससे रेलवे की उपलब्धि नजर आए, लेकिन वहाँ जो रवैया CPRO का देखने को मिला, वह चौंकाने वाला था।
सूचना देने के बजाय CPRO सुस्कर विपुल विलासराव ने ही हमसे सवाल उठा दिया—
“क्या करोगे जानकारी लेकर?”
जब हमारी टीम ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हम रेलवे की एक पॉज़िटिव स्टोरी बनाना चाहते हैं, तो उनका जवाब था—
“रैक साइडिंग में रैक आता है, मटेरियल लोड होता है और निकल जाता है… बस।”
इसके बाद उन्होंने बाकी जानकारी अगली बार देने की बात कही, लेकिन कब देंगे, यह स्पष्ट नहीं किया।
जब टीम ने वैधानिक रूप से रैक साइडिंग जाकर पूरी प्रक्रिया समझने की बात कही तो जवाब मिला—
“ठीक है… देखते हैं।”
उनके लहजे और व्यवहार से साफ महसूस हुआ कि वे मीडिया को रेलवे की सकारात्मक उपलब्धियों को दिखाने से भी परहेज़ कर रहे हैं।
जबकि केंद्र सरकार लगातार पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता तक सही जानकारी पहुँचाने पर जोर दे रही है। ऐसे में रेलवे का CPRO सुस्कर विपुल विलासराव मीडिया के प्रति सहयोगी न होकर उल्टा सवाल पूछे—यह गंभीर चिंता का विषय है।
GM तरुण प्रकाश बिलासपुर की कार्यशैली को देख कर लगता है कि वे पारदर्शिता और पब्लिक कनेक्ट को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन उनके ही कार्यालय में इस तरह का व्यवहार सवाल खड़े करता है
क्या रेलवे के जमीनी कामों को जनता के सामने लाना अब अपराध है?
मीडिया अगर पॉजिटिव स्टोरी भी करना चाहे तो CPRO सुस्कर विपुल विलासराव क्यों सहयोग नहीं कर रहे?
न्यूज़ हब इनसाइट जनता की आवाज़ और पारदर्शिता की लड़ाई आगे भी जारी रखेगा।
पूछता है न्यूज़ हब इनसाइट(NHI)
-गुणवत्ताहीन सड़क, FDR घोटाला, दिव्यांगों के फुटपाथ पर कब्जा… फिर भी कार्रवाई शून्य! आखिर किसके संरक्षण में हैं कमल सिंह ठाकुर और भरत कश्यप?”
-दिव्यांगों का हक़ पर पार्षद भरत कश्यप का कब्जा, कमल ने सड़कें बनाई घटिया… फिर भी सख्त कार्रवाई नहीं! जनता पूछे—क्या अमित कुमार के ऑफिस में सब ठीक है?”















