बिलासपुर। जब शब्दों की धार अन्याय पर प्रहार करे और साहित्य का हर पन्ना समाज में शुभता बोने लगे, तो ऐसा जीवन स्वयं में एक मानक बन जाता है। न्याय, सत्य और साहित्य की इसी निरंतर साधना के संवाहक, बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, उपन्यासकार एवं साहित्यकार केशव शुक्ल का जन्मदिवस भारतीय एवं वैदिक परंपरा के अनुसार अत्यंत गरिमापूर्ण और ओजस्वी माहौल में संपन्न हुआ।
वेदमंत्रों की गूंज, दीपों की देदीप्यमान लौ और काव्य-रसधारा के बीच शहर के तमाम मूर्धन्य साहित्यकारों, पत्रकारों और गणमान्य जनों ने जुटकर उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की मंगल कामनाएं कीं।
वेदमंत्रोच्चार और पंचदीप प्रज्ज्वलन से हुआ दिव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का आगाज़ गरिमामय वैदिक रीति-रिवाज के साथ हुआ। वेदमंत्रों के सस्वर पाठ से पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश भट्ट ने मुख्य आचार्य की भूमिका निभाई। उपस्थित अतिथियों के आत्मीय स्वागत के पश्चात पवित्रीकरण, देवपूजन और पंचदीप प्रज्ज्वलन किया गया। सामूहिक मंत्रोच्चार और काव्य पंक्तियों के माध्यम से वातावरण पूरी तरह मंगलमय हो उठा।
साहित्य मनीषियों के मुख से फूटीं आशीष और पंक्तियों की रसमंजरी
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डॉ. विनय कुमार पाठक (वरिष्ठ साहित्य मनीषी): अपने आशीर्वचन में उन्होंने कहा, “केशव जी निरंतर साहित्य की पवित्र साधना में लीन हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।” अपने मधुर कंठ से उन्होंने ये पंक्तियां समर्पित कीं—
पूर्वजों का आशीष मिला, करिए मन नहीं भारी।
यश-कीर्ति जिनके खाते में, सराहती दुनिया सारी।।
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विजय तिवारी (वरिष्ठ साहित्यकार एवं मंच संचालक): “जो लोग मानव जीवन में शुभता, सदाचार और सद्गुण भरने का प्रयत्न करते हैं, उनका जीवन विलक्षण हो जाता है।”
कुछ लोग विलक्षण जीवन में, जीवन भर शुभता बोते हैं।
अपने उद्यम से मानक बन, जग-शीर्ष शिखर पर होते हैं।।
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ओमप्रकाश भट्ट (वरिष्ठ कवि): उन्होंने आल्हा छंद के माध्यम से केशव शुक्ल जी के बेबाक पत्रकारिता जीवन को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शब्दों को हथियार बनाकर अन्याय को ललकारा है—
पत्रकारिता पगडंडी पर, सत्य रहा जिनका आधार।
शब्दों को हथियार बनाकर, किया असत् पर सदा प्रहार।।
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अमृतलाल पाठक (वरिष्ठ कवि): उन्होंने सच्ची मित्रता की महत्ता पर रोशनी डालते हुए कहा—
तेरी मेरी मित्रता, ज्यों सोने में गंध।
दूध संग मिश्री सदृश, दोनों का अनुबंध।।
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बुधराम यादव (वरिष्ठ साहित्यकार): उन्होंने जीवन का गूढ़ सूत्र देते हुए कहा कि हर क्षण को सार्थक बनाना ही जीवन है—
मानो हर पल को अंतिम क्षण, और रहो उड़ने तैयार।
पल भर की वह चूक हमें न, जाने देगी भव से पार।।
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राजेश सोनार (वरिष्ठ कवि): गोष्ठी को आध्यात्मिक भाव से जोड़ते हुए शुभकामना दी—
स्वस्थ, सुखी, दीर्घायु जिंदगी, का हो निशि-दिन साथ।
दिग्गजों की मौजूदगी में सजा साहित्य का मंच
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वयं जन्मदिन पुरुष, वरिष्ठ पत्रकार व उपन्यासकार केशव शुक्ला ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम का कुशल और जीवंत संचालन वरिष्ठ साहित्यकार विजय तिवारी ने किया।
इस गरिमामय अवसर पर साहित्य, पत्रकारिता और प्रशासनिक जगत की अनेक प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। उपस्थित प्रमुख जनों में:
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डॉ. शोभा त्रिपाठी ‘शैव्या’, अशोक त्रिपाठी
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सेवानिवृत्त IAS रमेश चंद्र श्रीवास्तव
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राकेश पाण्डेय “अयोध्या”, शिव मंगल शुक्ला
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डॉ. श्रीमती सर्वेश पाठक, डॉ. देवेंद्र पाठक, विष्णु तिवारी
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अभय नारायण रॉय
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पत्रकार प्रशांत सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और प्रबुद्ध नागरिक शामिल रहे।







