बिलासपुर। गणेशोत्सव के बीच बिलासपुर में मराठी समाज की पारंपरिक महालक्ष्मी (गौरी) पूजन की शुरुआत श्रद्धा और उत्साह के साथ हुई। सरकंडा, तिलक नगर, टिकरापारा, नेहरू नगर, पारिजात कॉलोनी, एसईसीएल एवं रेलवे कॉलोनी सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मराठी परिवारों ने विधि-विधान और अपनी-अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार गौरी आवाहन किया।
भाद्रपद मास में होने वाला यह तीन दिवसीय पर्व मराठी परिवारों के लिए विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखता है। पहले दिन गौरी आवाहन के साथ महालक्ष्मी के घर आगमन की परंपरा निभाई गई। महिलाओं ने घर के मुख्य द्वार से पूजा स्थल तक रंगोली और कुमकुम से देवी के शुभ चरण बनाए और इन्हीं पवित्र पदचिह्नों के माध्यम से महालक्ष्मी के घर में प्रवेश का प्रतीकात्मक स्वागत किया।
अलग-अलग परिवारों में परंपरा के अनुसार तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर महालक्ष्मी का मुखौटा स्थापित कर उसे आकर्षक रूप से सजाया गया। देवी को सुंदर साड़ी, सोने अथवा मोतियों के आभूषण और हरी चूड़ियां पहनाकर श्रृंगार किया गया। गौरी के स्वागत के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक भाव से कहा— “अशी लक्ष्मी आली, सोन्याच्या पाऊलांनी आली, सुख-समृद्धी घेऊन आली।” अर्थात महालक्ष्मी स्वर्णिम चरणों के साथ घर आई हैं और अपने साथ सुख-समृद्धि लेकर आई हैं।
सरकंडा में घर-घर हुआ गौरी का आवाहन
सरकंडा क्षेत्र में भी महालक्ष्मी पूजन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। दिलीप चोपड़े, प्रवीण दिघ्रस्कर, दत्तात्रेय श्रृंगाले, श्रीकांत श्रृंगाले, शेखर विठ्ठलकर, बालू दिग्रसकर, रविन्द्र चिपड़े सहित अनेक मराठी परिवारों के घरों में परंपरागत रूप से देवी का आवाहन कर उनका स्वागत किया गया।
महालक्ष्मी के आगमन के साथ ही घरों में धार्मिक वातावरण के साथ मराठी संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक दिखाई दी। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में पूजा-अर्चना के साथ परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की परंपरा निभाई जाएगी।
बिलासपुर में महालक्ष्मी पूजन ने एक बार फिर धार्मिक आस्था के साथ मराठी संस्कृति, पारिवारिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता की खूबसूरत तस्वीर पेश की।







